
जलालपुर, अंबेडकरनगर। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई व्यापारिक लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने के विरोध में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जलालपुर तहसील परिसर में धरना दिया। प्रदर्शन के बाद कांग्रेसियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार उत्कर्ष सिंह को सौंपकर प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।

धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क लगाए जाने के पीछे अमेरिका का दबाव है। उन्होंने कहा कि यूपीआई से जुड़े प्रमुख ऐप प्रदाताओं में अमेरिकी कंपनी गूगल भी शामिल है और शुल्क व्यवस्था से विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंचने की आशंका है।
हालांकि, सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक एमडीआर शुल्क सरकार या एनपीसीआई द्वारा ग्राहकों से वसूला जाने वाला टैक्स या शुल्क नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार ₹2,000 तक के पर्सन टू मर्चेंट और पर्सन टू पर्सन लेनदेन पर एमडीआर लागू नहीं है।
कांग्रेस ने जताई व्यापारियों पर आर्थिक बोझ की चिंता
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यूपीआई आज आम लोगों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में व्यापारिक लेनदेन पर अतिरिक्त लागत की व्यवस्था से कारोबारियों पर आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। नेताओं ने सरकार से एमडीआर शुल्क को वापस लेने की मांग की।

धरने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नायब तहसीलदार उत्कर्ष सिंह को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से यूपीआई लेनदेन पर लागू की गई एमडीआर शुल्क को समाप्त करने तथा डिजिटल भुगतान व्यवस्था को पहले की तरह शुल्कमुक्त रखने की मांग की गई।
धरने में कांग्रेस सोशल मीडिया के प्रदेश प्रभारी बृजेश यादव, ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार अग्रहरि, जिला विकलांग प्रकोष्ठ अध्यक्ष वीर बहादुर, राजेश वर्मा, विमल कुमार, रामाशंकर यादव सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
