-
महापुरुषों की तपोभूम उदासीन आश्रम हनुमान मंदिर में गुरु पर्व के अवसर पर वर्षों से चली आ रही है परंपरा विधि विधान वैदिक मंत्रोच्चारण क शुरू की गई
टांडा (अम्बेडकरनगर) टांडा में महापुरुषो की तपोभूमि उदासीन उदासीन आश्रम हनुमान मंदिर मीरानपुरा टांडा तथा उदासीन आश्रम बड़ा फाटक छज्जापुर टांडा में गुरुपर्व के अवसर पर वर्षो से चली आ रही परंपरा के अनुसार विधिविधान से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गुरूओ एवं महापुरूषों की अरदास की गयी । धर्म ध्वजा फहराकर विशेष पूजा की गयी ,वही विभिन्न क्षेत्रो से सैकड़ों शिष्यों ने गुरुजनों को नमन किया एवं समाधिस्थ महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की । इसके बाद संत समागम का आयोजन किया गया जहां शिष्यों ने भजन-कीर्तन कर गुरू का स्मरण किया । इस दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया ।
गौरतलब है कि उदासीन संप्रदाय एवं उदासीन आश्रमों के जनक गुरु नानकदेव जी के जेष्ठ पुत्र आचार्य गुरु श्रीचंद्र महाराज है 500 वर्ष पूर्व उन्होंने उदासीन आश्रम की स्थापना की थी ,गुरु स्मरण का यह कार्यक्रम हर वर्ष पितृ पक्ष की दशमी को बरसों से मनाया जाता है । महंत दीनदयाल दास तथा डा. महंत चंद्र प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि गुरुपर्व भक्तों की मनोकामना पूरी करने का खास दिन माना जाता है इसी दिन तपोभूमि पर संतो,महात्माओं व अन्य लोगों का आगमन होता है। गुरूओं के स्मरण का यह पर्व पूरी सादगी से मनाया जाता है । उदासीन आश्रम में होने वाले अनुष्ठान केवल पूजा-अर्चना भर नहीं हैं, बल्कि यह हमारे ऋषि-मुनियों की सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं। ऋषि परंपरा ने हमें साधना, संयम और समाज कल्याण का मार्ग दिखाया है।
