जलालपुर, अंबेडकरनगर। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी के पावन अवसर पर बुधवार को जलालपुर तहसील क्षेत्र में ललही छठ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसरों में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ जुटने लगी। माताओं ने संतान की सुख-समृद्धि, रक्षा और दीर्घायु की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखा और विधि-विधान से भगवान बलराम व माता षष्ठी की पूजा-अर्चना की।

उत्तर भारत में ललही छठ को हल छठी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल और मुसल था, इसी वजह से इस पर्व को हल छठी भी कहा जाता है। पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह रहा। सुबह स्नान के बाद महिलाएं पारंपरिक परिधान में पूजा सामग्री लेकर मंदिर पहुंचीं। यहां कुश की गांठ बांधकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा की गई और लोकगीत गाए गए।
ललही छठ के व्रत में खान-पान को लेकर भी विशेष परंपरा है। मान्यता के अनुसार व्रती महिलाएं खेत में उगे अनाज और सामान्य फलों का सेवन नहीं करती हैं। व्रत के दौरान दही, महुआ और तिन्नी के चावल का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं दिनभर निर्जला रहकर संतान की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं और पूजा के बाद व्रत का पारण करती हैं।

ग्रामीण महिलाओं के अनुसार ललही छठ केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि मातृत्व की आस्था और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। संतान की रक्षा और लंबी आयु की कामना के लिए हर वर्ष महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ यह व्रत रखती हैं। एक व्रती महिला ने बताया कि इस दिन वे अपने बच्चों के सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं।
पर्व के दौरान मंदिर परिसर पारंपरिक लोकगीतों और भजन-कीर्तन से गूंजते रहे। क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया। महिलाओं के सामूहिक पूजन से मंदिर परिसर पूरे दिन आस्था और भक्ति के रंग में सराबोर रहा।

