चार साल से 25 फीट रास्ते की मांग, चार वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काटता रहा दिव्यांग परिवार
अंबेडकरनगर के जलालपुर में करीब 25 फीट रास्ते के निर्माण की मांग को लेकर एक दिव्यांग परिवार पिछले चार वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायतों के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दिव्यांग दंपती ने अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ तहसील परिसर में भूख हड़ताल शुरू कर दी। भूख हड़ताल शुरू होते ही प्रशासन हरकत में आया और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिवार से बातचीत की।

मामला जलालपुर तहसील क्षेत्र के पिंडोरिया गांव का है। जहां एक दिव्यांग दंपत्ति अपने घर तक करीब 25 फीट रास्ते के निर्माण की मांग को लेकर लंबे समय से अधिकारियों से गुहार लगा रहा है। पूर्णिमा पाण्डेय पत्नी सत्य प्रकाश पाण्डेय का कहना है कि पिछले चार वर्षों में तहसील से लेकर उच्च अधिकारियों तक लगातार शिकायतें की गईं, लेकिन रास्ते का निर्माण नहीं हो सका।
समस्या का समाधान न होने से नाराज दिव्यांग दंपती ने सोमवार शाम अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ तहसील परिसर में भूख हड़ताल शुरू कर दी। परिवार ने साफ कहा कि जब तक रास्ते का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक भूख हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।

धरने की जानकारी मिलते ही सोमवार देर शाम उपजिलाधिकारी मधुमिता सिंह और नायब तहसीलदार हरिराम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार से बातचीत कर रास्ता बनवाने का आश्वासन दिया, लेकिन परिवार ने कहा कि वह वर्षों से आश्वासन सुनता आ रहा है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद ही भूख हड़ताल समाप्त की जाएगी।
रातभर तहसील परिसर में धरना जारी रहने के बाद मंगलवार सुबह भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीएम मधुमिता सिंह और नायब तहसीलदार हरिराम ने परिवार से बातचीत की। इसके बाद अधिकारियों ने गांव पहुंचकर प्रस्तावित रास्ते का स्थलीय निरीक्षण किया और रास्ता बनवाने की प्रक्रिया शुरू कराने की पहल की।
वहीं, दिव्यांग परिवार अब जिलाधिकारी से सीधे मुलाकात की मांग पर अड़ा हुआ है। परिवार का कहना है कि जिलाधिकारी स्वयं उनकी समस्या सुनें और रास्ते के निर्माण को लेकर ठोस आश्वासन दें, तभी वह धरना समाप्त करेंगे।
दिव्यांग परिवार की भूख हड़ताल की जानकारी मिलने पर दिव्यांग महागठबंधन के जिलाध्यक्ष दुर्गेश मिश्रा भी तहसील पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर उनकी समस्या की जानकारी ली। उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
चार साल तक शिकायतों के बाद भूख हड़ताल शुरू होते ही प्रशासन का गांव पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण करना अब सवाल खड़े कर रहा है। आखिर जिस 25 फीट रास्ते के लिए परिवार वर्षों से अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा था, उसके समाधान के लिए उसे भूख हड़ताल तक क्यों पहुंचना पड़ा?
वहीं एसडीएम मधुमिता सिंह ने बताया कि “नायब तहसीलदार हरिराम के नेतृत्व में टीम बनाकर रास्ता बनवाने के लिए भेज दिया गया है।”
