Wednesday, May 18, 2022
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UP Chunav: मायावती को लगा एक और तगड़ा झटका, 17 साल बाद बसपा छोड़ BJP में आए पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा

भदोही: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh News) की सियासत में दल बदलने का सिलसिला अभी जारी है. भाजपा ने मायावती की बसपा को एक और बड़ा झटका दिया है. पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा (Rangnath Mishra) ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है. 17 साल के बाद रंगनाथ मिश्रा दोबारा भाजपा में पहुंचे हैं.

रंगनाथ मिश्रा के भाजपा ज्वाइन करने के बाद भदोही जनपद में सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं. चुनाव के पहले भाजपा ज्वाइन करने के बाद अब लोगों में यह चर्चा खास हो गई है कि भदोही जनपद की ज्ञानपुर या भदोही विधानसभा सीट से भाजपा उनको चुनावी मैदान में उतार सकती है.

रंगनाथ मिश्र का कैसा रहा सियासी सफर

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80 के दशक में रंगनाथ मिश्रा ने भाजपा से सियासी सफर शुरू किया था. भदोही जनपद में भाजपा के वह जिलाध्यक्ष रह चुके हैं. औराई विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर वह 1993 में पहली बार विधायक बने थे. उसके बाद 1996 में भाजपा से ही उन्होंने जीत दर्ज की थी और उनको सरकार में ऊर्जा राज्यमंत्री, मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण सहित वन मंत्री बनाया गया.

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जिसके बाद इन्होंने अपना सियासी सफर बहुजन समाज पार्टी में शुरू किया. 2007 में विधानसभा चुनाव जीतकर बसपा सरकार में माध्यमिक शिक्षा मंत्री बने, जिसके बाद लंबे समय तक बसपा में रहे और बसपा में इनका बड़ा कद रहा. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में रंगनाथ मिश्रा भदोही विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े लेकिन उनको वहां से हार का सामना करना पड़ा.

पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्रा के भाजपा ज्वाइन करने से बसपा को लगा तगड़ा झटका
रंगनाथ मिश्रा पूर्वांचल में बसपा का एक बड़ा चेहरा रहे हैं. पूर्वांचल में ब्राह्मण वोट बैंक पर रंगनाथ मिश्रा की अच्छी पकड़ मानी जाती है.

शनिवार को उन्होंने बसपा की सदस्यता को छोड़कर लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, जिसके बाद अब भदोही जनपद में सियासी बाजार गर्म हो गया है और जनपद में विधानसभा चुनाव का समीकरण बदलता दिख रहा है.

लोगों में इस बात की चर्चा है कि रंगनाथ मिश्रा भदोही विधानसभा या ज्ञानपुर विधानसभा में से किसी एक सीट पर भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि अब आने वाला वक्त बताएगा कि चुनाव के पहले रंगनाथ मिश्रा ने जिस तरह से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है, पार्टी उनको किस तरह की जिम्मेदारी सौपेगी.

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