Uttar Pradesh

यूपी चुनाव में बड़े पैमाने पर जाली नोट खपाने की थी तैयारी, सरगना जीआरपी का स‍िपाही लखनऊ में ग‍िरफ्तार

लखनऊ, । जाली नोट की तस्करी करने वाले गिरोह का तालकटोरा पुलिस ने राजफाश किया है। गिरोह का संचालन जीआरपी में तैनात सिपाही कर रहा था। डीसीपी पश्चिम सोमेन बर्मा के मुताबिक 81,550 रुपये जाली नोट के साथ पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित रिफा कोलोनी ठाकुरगंज में किराए का कमरा लेकर गिरोह का संचालन कर रहे थे।

जीआरपी का सिपाही राहुल सरोज चारबाग स्टेशन व अन्य स्थानों पर नकली नोट खपाता था। विधानसभा चुनाव में जाली नोटों की बड़ी खेप बाजार में खपाने की योजना थी। पुलिस तीन फरार तस्करों के बारे में पता लगा रही है।

डीसीपी पश्चिम ने बताया कि कुछ दिन से जाली नोटों के तस्करों के बारे में सूचना मिल रही थी। इसकी पड़ताल के लिए सर्विलांस टीम को लगाया गया था। इसके बाद तालकटोरा आलमनगर पुल के पास से पांचों को दबोच लिया गया। पकड़े गए आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि वे 10 हजार रुपये असली नोट लेकर 60 हजार के जाली नोट देते थे।

आरोपितों के पास से 20, 50, 100, 200 और 500 के जाली नोट मिले हैं। आरोपितों में राहुल सरोज के अलावा हसनगंज निवासी सलमान व अरबाज, बिहार निवासी मोहम्मद मबश्शिर तथा ठाकुरगंज निवासी शावेज खान शामिल हैं।

पुलिस ने किराए के कमरे से जाली नोट बनाने के उपकरण बरामद किए हैं। आरोपितों के पास से उच्च गुणवत्ता के प्रि‍ंटर, पेपर व टेप, इंक, मोहर व बाइक समेत अन्य सामान बरामद किए गए हैं।

फरार आरोपित जमील ने बनाई थी योजना, राहुल ने किया निवेश : जाली नोट तस्करी के गिरोह में शामिल जमील, यूसुफ और कादिर अभी फरार हैं। जमील ने ही जाली नोट छापने की योजना बनाई थी। राहुल ने मशीन खरीदने के लिए रुपये लगाए थे। इसके बाद गिरोह नोट छापकर बाजार में खपत करने लगा।

पड़ताल में सामने आया कि जमील की ट्रेवेल एजेंसी थी, जहां वह बसें चलवाता था। जमील के यहां सलमान काम करता था और बसों में यात्रियों को बैठाता था। चारबाग में सलमान की मुलाकात राहुल से हुई थी। जमील ने सात माह पहले आपसी विवाद में आशियाना में आशीष लाला को गोली मार दी थी।

पेशी पर सलमान उससे मिलने गया, जहां उसने जाली नोट छापने की योजना बनाई। जेल से छूटकर जमील ने राहुल से भेंट की। राहुल ने रुपये निवेश किए और तस्करी का धंधा शुरू हो गया।

स्कैन कर बनाते थे जाली नोट :

एडीसीपी चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक असली नोट को स्कैन कर गिरोह जाली नोट तैयार करता था। आरोपित मुजफ्फरनगर से एल आकार की स्केल खरीदी थी, जो स्कैङ्क्षनग के दौरान इस्तेमाल की जाती थी। इसके बाद उसे कटर से काटकर गड्डी बनाई जाती थी। आरोपित इसके लिए असली नोट के बराबर पतला कागज इस्तेमाल करते थे।

गिरोह ने आपस में काम बांट रखा था। सलमान और मुबश्शिर के पास नोट बनाने, अरबाज के पास नोट काटने, कदीर और युसूफ के पास सुरक्षा धागा के स्थान पर की टेप लगाने तथा जमील व शावेज के पास जाली नोट की तस्करी का काम था। शावेज कैंटीन चलाता है, जहां से जाली नोट की सप्लाई की जाती थी। पड़ताल में सामने आया है कि पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपितों ने बड़ी मात्रा में जाली और अर्धनिर्मित नोट जला दिए थे।

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