Uttar Pradesh

मुश्किल में समाजवादी पार्टी: वायरल वीडियो को लेकर भाजपा ने घेरा, एक्शन में पुलिस

लखनऊ : यूपी विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ही समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। कोविड प्रोटोकॉल के तहत चुनाव आयोग ने किसी भी राजनीतिक पार्टी को रैली और जनसभा की अनुमति नहीं दी है। इसी बीच सपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रचना सिंह के एक वीडियो पर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, इस वीडियो को रचना ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। इस वीडियो में सपा कार्यकर्ता रोड शो करते हुए नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो के बैकग्राउंड म्यूजिक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसमें बैकग्राउंड म्यूजिक में मां तुझे सलाम गाने को शामिल किया गया है। दरअसल, इसके वीडियो में कहा जा रहा है, ‘हिम्मत है जो तो रोक ले, सख्ती से हम डरते नहीं। अपना लहू कहता है ये…हम वीर हैं… मरते नहीं। फूंक डालो दुश्मनों को, काट डालो इन **** को।’

वहीं, इस गाने को लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर चुनाव आयोग को टैग करते हुए कार्रवाई की मांग की है। शहजाद का कहना है कि समाजवादी पार्टी खुलेआम काटने, फूंकने की धमकी दे रही है। ये लोगों को भड़काने का काम है। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भी हरकत में आ गई। ट्विटर पर ही यूपी पुलिस ने मामले में कानपुर देहात पुलिस को इस मामले में उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि समाजवादी पार्टी ऐसे शब्दों का प्रयोग करके चुनाव के माहौल को खराब करना चाहती है। सपा के लोग दंगा भड़काना चाहते हैं। शहजाद ने आयोग से इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।इससे पहले भी लखनऊ में वर्चुअल रैली के नाम पर भारी-भरकम भीड़ जुटाने के आरोप में चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी को नोटिस जारी किया है। मामले में 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा है।

लखनऊ में वर्चुअल रैली के नाम पर भारी-भरकम रैली आयोजित करने के आरोप में चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी को कोविड के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किया है। पार्टी ने 14 जनवरी को अपने कार्यालय में एक विशाल जनसभा आयोजित की थी। चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया है, अगर इस वक्त पर जवाब नहीं आया तो आयोग कार्रवाई कर सकता है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग (ईसीआई) ने 8 जनवरी को देश के कुछ हिस्सों में कोविड -19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर शारीरिक रैलियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। शनिवार को इस प्रतिबंध को 22 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया। दूसरी ओर बीते शुक्रवार को लखनऊ पुलिस ने रैली में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

लखनऊ के पुलिस आयुक्त के मुताबिक, लगभग 2,500 समाजवादी पार्टी के नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188, 269, 270 और 341 के तहत महामारी रोग अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शहर के पुलिस प्रमुख ने कहा कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले वीडियो साक्ष्य हासिल किए गए थे। रैली के दृश्यों में लखनऊ पुलिस को एसपी कार्यालय के बाहर जमा भीड़ को साफ करते हुए दिखाया गया है।

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