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पेराई सत्र के शुभारंभ के नाम पर किसानों से किया छलावा, बंद पड़ी चीनी मिल

मिल के न चलने से कोल्हू पर औने पौने दामों में गन्ना बेचने को मजबूर किसान
पूरनपुर, पीलीभीतजनप्रतिनिधियों ने चीनीमिल के पेराई सत्र का शुभारंभ के नाम पर किसानों से छलावा किया है। मिल के न चलने पर किसान सस्ते दामों में कोल्हू पर गन्ना बेचने को मजबूर हो रहे हैं। जिसके चलते कोल्हू मालिकों की चांदी कट रही है। क्षेत्र में अभी तक चीनी मिल को चालू नहीं होने की बात कही जा रही है। जिसके चलते इस बार गन्ना काश्तकारों को गेंहू की बुवाई करने में परेशानी होने की बात सामने आ रही है। पेड़ी व सेड़ी गन्ने की जमीन में गेंहू की बुवाई करने वाले किसानों को मजबूरन गन्ना कोल्हू पर डालना पड़ रहा है। 
चीनी मिल में पेराई शुरू न होने की वजह से किसानों ने कोल्हुओं पर गन्ना बेचना शुरू कर दिया है।
दि किसान चीनी मिल पूरनपुर के चालू न होने से किसानों में नाराजगी देखी जा रही हैं। पेराई सत्र का शुभारंभ होने के बाद भी चीनी मिल के न चालू होने के कारण किसान परेशान दिखाई दे रहे हैं। वही चीनी मिल के चालू न होने के कारण किसान अपना गन्ना औने पौने दामों में कोल्हू पर बेचने को मजबूर हैं। जिसके कारण किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वही चीनी मिल शुरू होने में लगभग अभी  एक सप्ताह का समय लग सकता है।सहकारी चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ 28 नवंबर को कर दिया गया है, लेकिन पेराई शुरू नहीं हो सकी है। चीनी मिल में अभी मरम्मत का ही कार्य चल रहा है। जिसमें चार से पांच दिन का समय लगना बताया जा रहा है। एक माह चीनी मिल का पेराई सत्र लेट होने से करीब छह लाख क्विंटल गन्ना की पेराई नहीं हो सकी। अधिकारियों की लापरवाही के चलते दिसंबर के प्रथम सप्ताह में पेराई शुरू होने की उम्मीद है। सैकड़ों किसानों ने समय पर चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू न होने के कारण कोल्हू और क्रेशर आदि पर सौ रूपये घाटा खाकर 250 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ने को बिक्री कर दिया। इसके बाद भी सैकड़ों किसान गेहूं की बुवाई से वंचित रह गए। जबकि अन्य मिलों का पेराई सत्र पिछले माह से ही शुरू हो गया। पेराई सत्र के नाम पर खानापूरी होने से किसानों में बेहद आक्रोश है। उनका गन्ने की खेती से मोह भंग हो रहा है। भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह ने कहा पेराई सत्र के शुभारंभ के नाम पर किसानों से छलावा किया गया है। बंद पड़ी चीनी मिल से किसान काफी परेशान हैं।

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