Wednesday, May 18, 2022
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UP Chunav 2022 : 41 में से 27 सीटों पर नौ विधायकों का पत्ता साफ, BJP ने क्यों काटे इनके टिकट? सामने आई बड़ी वजह

Lucknow : भाजपा ने गोरखपुर-बस्ती मंडल में 2017 की सफलता दोहराने के लिए अब तक घोषित सीटों पर एक तिहाई विधायकों के टिकट काट दिए हैं। अभी तक 41 में से 27 सीटों पर नौ विधायकों का पत्ता साफ हो गया है जबकि एक विधायक खुद पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हो चुका है। ज्यादातर विधायकों के टिकट कटने की प्रमुख वजह मतदाताओं में उनको लेकर नाराजगी रही। पार्टी ने अंदरखाने जो सर्वे कराया था, उनमें इनका रिपोर्ट कार्ड संतोषजनक नहीं मिला था। सिर्फ गोरखपुर सदर सीट ऐसी रही है जहां किसी विवाद की वजह से नहीं बल्कि खुद मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बनने से मौजूदा विधायक का टिकट कटा है।

खजनी : संतप्रसाद ने व्यक्त की थी अनिच्छा

पंचायत चुनाव में खजनी विधायक संत प्रसाद विवादों में आ गए थे। कई मौके पर बढ़ती उम्र को लेकर स्वयं भी सार्वजनिक रूप से चुनाव लड़ने के प्रति अनिक्षा व्यक्त की थी। 1996, 2012 एवं 2017 में विधायक रहे। उनके प्रति स्थानीय मतदाताओं में नाराजगी भी थी।

सहजनवा : शीतल को परिवार का दखल भारी पड़ा

सहजनवा विधायक शीतल पाण्डेय का विकास कार्यो में ज्यादा रुचि न दिखाने, कार्यकर्ताओं से बढ़ती दूरी और राजनीतिक कार्यों में परिवार के सदस्यों की बढ़ती दखलनदांजी टिकट कटने की वजह बनी। बाढ़ के दौरान उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा था। स्थानीय मतदाता भी भाजपा पर प्रत्याशी बदलने का दबाव बना रहे थे।

देवरिया सदर: खींचतान में कटा डॉ सत्यप्रकाश का टिकट

देवरिया सदर से डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी का टिकट पार्टी की खींचतान के कारण कटा। 2017 में जीते भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के निधन के बाद नवंबर 2020 में हुए उपचुनाव में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी ने जीते थे। उपचुनाव के समय से ही पार्टी में जारी खींचतान को संभाल नहीं सके।

रामपुर कारखाना: कमलेश की सेहत बनी राह का रोड़ा

रामपुर कारखाना से विधायक कमलेश शुक्ल का टिकट उनके स्वास्थ्य की वजह से भी कट गया। चुनाव जीतने के कुछ महीने बाद ही वे लकवा के शिकार हो गए। करीब डेढ़ साल तक उनका इलाज चलता रहा। ऐसे में क्षेत्र में उनकी उपस्थिति नहीं ज्यादा नहीं हो सकी।

बरहज: सुरेश पार्टी और सरकार में नहीं बिठा पाए सामंजस्य

2017 में सुरेश तिवारी बसपा से भाजपा में आए थे। चुनाव जीतने के बाद भी वह क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ समंजस्य नहीं बैठा पाए। कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी बाद में बढ़ती गई। पार्टी व सरकार से भी उनका सामंजस्य ठीक नहीं रहा। मुख्यमंत्री के खिलाफ भी उनका एक ऑडियो चर्चा में रहा।

कुशीनगर : रजनीकांत को बेटे की हरकतों से गंवाना पड़ा टिकट

कुशीनगर से विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी का टिकट कटा है। बेटे की करतूतों से उनकी छवि पहले जैसी नहीं रह गई थी। बेटे के विवाद के मामले कई बार पुलिस तक पहुंचे थे। बेटे पर विकास कार्यों में दखल देने के भी आरोप थे। बेटा खुद को विधायक प्रतिनिधि के रूप में प्रोजेक्ट करता था।

हाटा : पवन केडिया को कार्यकर्ताओं की नाराजगी भारी पड़ी

हाटा विधायक पवन केडिया से पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी थी। विकास कार्यों में इन पर मनमानी के आरोप थे। इनके परिवार पर कार्यकर्ताओं से बदसलूकी के भी आरोप लगते रहे। इनके चलते हाटा भाजपा दो धड़ों में बंट गई थी। गुटबाजी कई बार बड़े नेताओं तक पहुंची थी।

फाजिलनगर: गंगा की उम्र बनी बाधा, इनाम में बेटे को टिकट

फाजिल नगर विधायक गंगा सिंह कुशवाहा की उम्र 85 साल हो चुकी है। उन पर किसी तरह के आरोप नहीं थे। उनकी जगह बेटे सुरेंद्र कुशवाहा को टिकट मिला है। इन्हें पार्टी में निष्ठापूर्वक लंबे समय से सक्रियता का इनाम मिला है।

धनघटा : कार्यकर्ताओं की नाराजगी से बदल गई मंत्री की सीट

धनघटा सीट से विधायक रहे प्रदेश सरकार के उद्यान राज्य मंत्री श्रीराम चौहान के बारे में माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी के चलते शीर्ष नेतृत्व ने नए चेहरे को तरजीह दी है। उन्हें बगल की खजनी सीट से प्रत्याशी बनाया गया है।
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