Wednesday, May 18, 2022
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ओमप्रकाश राजभर और चाचा शिवपाल से गठबंधन कर बुरे फंसे अखिलेश? गढ़ में टिकट बंटवारे को लेकर शुरू हुई खींचतान

आजमगढ़. यूपी की सत्ता में आने का सपना देख रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सुभासपा (SBSP) और प्रसपा (PSPL) से गठबंधन कर बड़ा दांव चला है, लेकिन उनका यह दांव टिकट बंटवारे में अब उनपर ही भारी पड़ता दिखाई दे रहा है.

सूत्रों की मानें तो आजमगढ़ (Azamgarh) में एक सीट प्रसपा और दो सीटों की मांग सुभासपा कर रही है, जबकि इन तीनों सीटों पर सपा के पहले से कई दावेदार हैं. अगर सपा दोनों दलों के नेताओं को टिकट नहीं देती है तो गठबंधन में जहां खींचतान बढ़ेगी, वहीं अगर सीटें गठबंधन के खाते में जाती है तो सपा को अपने ही नेताओं से भीतर घात का खतरा भी बढ़ जायेगा.

पूर्वाचल में आजमगढ़ जिला समाजवादी पार्टी का गढ़ है. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने यहां 10 में से नौ सीटें जीती थी, जबकि एक सीट बसपा के खाते में गई थी. वर्ष 2017 में बीजेपी की लहर होने के बाद भी सपा पांच सीट जीतने में सफल हुई थी, जबकि बसपा के खाते में चार सीट गयी थी. बीजेपी एक सीट जीतने में सफल हुई थी.

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वर्ष 2022 के चुनाव की घोषणा हो चुकी है. सातवें चरण में आजमगढ़ में चुनाव होना है. बीजेपी निषाद पार्टी से गठबंधन कर मैदान में उतर रही है. अतरौलिया सीट निषाद पार्टी के खाते में बीजेपी ने दे दिया है. यहां से बाहुबली अखंड प्रताप सिंह की पत्नी व पूर्व ब्लाक प्रमुख वंदना सिंह का टिकट निषाद पार्टी से लगभग तय माना जा रहा है.

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ऐसे में अतरौलिया सीट भी सपा की फंसती हुई दिखाई दे रही है. कारण यह है कि इस सीट पर बाहुबली अखंड प्रताप सिंह का सर्वण मतदाताओं में अच्छा खासा प्रभाव है. यहां करीब 35 हजार निषाद मतदाता है, जो पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ खड़े हुए थे. अगर यह समीकरण सही बैठा तो वंदना सिंह से मुकाबला करना सपा के लिए मुश्किल होगा.

इन सीटों पर फंसता दिख रहा पेंच

वहीं चर्चा है कि सगड़ी सीट अपना दल के खाते में जा सकती है. समाजवादी पार्टी की बात करें तो प्रसपा और सुभासपा से गठबंधन होने के बाद लालगंज और मेंहनगर सुरक्षित विधानसभा सीट पर राजभरों की संख्या 50 हजार से अधिक है. इसलिए ओमप्रकाश राजभर यह दोनों सीट सपा से अपने खाते में मांग रहे हैं. वर्ष 2017 में बीजेपी ने सुभासपा को मेंहनगर सीट दी थी. जबकि मेंहनगर सीट से सपा के वर्तमान विधायक कल्पानाथ पासवान है.

वहीं इसी सीट पर बसपा छोड़ सपा में शामिल हुई विद्या चौधरी, पूर्व विधायक बृजलाल सोनकर समेत कई नेता दावेदारी कर रहे है. वहीं सुभासपा लालगंज सीट भी सपा से मांग रही है. लालगंज सुरक्षित सीट पर पिछले चुनाव में बसपा को जीत मिली थी. यहां से बसपा के आजाद अरिमर्दन विधायक है. यहां से वर्ष 2017 में सपा से पूर्व विधायक बेचई सरोज उम्मीदवार थे. यहां सवर्णो के साथ राजभर समुदाय की भी संख्या ठीक-ठाक हैं.

देनों सीटों पर टिकट के लिए सुभासपा के मांगने से सपा के दावेदारों में बेचैनी बढ़ गयी है. इसी तरह मुबारकपुर सीट शिवपाल यादव अपने करीबी नेता पूर्व विधायक व पार्टी के महासचिव रामदर्शन यादव के लिए चाहते हैं. लेकिन यहां से सपा की तरफ से अखिलेश यादव, चंद्र देव राम यादव करैली और शाहआल सहित कई दावेदार हैं.

सपा में भीतरघात का खतरा बढ़ सकता है

पिछले दो चुनाव में सपा राम दर्शन की वजह से ही हारी थी. सपा नेताओं में इस बात की टीस भी है. ऐसे में अगर यह सीट सहयोगी दल को जाती है तो सपा में भीतरघात का खतरा बढ़ सकता है.

वहीं सुभासपा के प्रदेश महासचिव व पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता का कहना है कि उनकी पार्टी पिछले एक वर्षो से चुनाव के पहले से ही जिले की सभी विधानसभा सीटों पर तैयारियां कर रही है. उन्होने कहा कि उनकी पार्टी जिले में दो विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ये सीटें किसी भी विधानसभा से मिलेगी पार्टी उन सिटों पर जीत हासिल करने की स्थित में है.

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