Politics

अखिलेश राज में औरों को रूलाने वाले, आज खुद आंसुओं से रो रहे हैं

सपा फिर लगाने जा रही है आजम-अब्दुल्ला पर दांव

अजय कुमार,लखनऊ

समाजवादी पार्टी का मुस्लिम चेहरा समझे जाने वाले आजम खान के पुत्र अब्दुल्ला खान जेल से बाहर आ गए हैं.  जन्मतिथि में फेरबदल करके 2017 में रामपुर की स्वार विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने और जीतने वाले अब्दुल्ला का उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव से ठीक पहले जमानत पर जेल से बाहर आना और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा अब्दुल्ला के कृत्य को दरकिनार करके पुनः रामपुर की स्वार विधान सभा सीट से टिकट दिया जाना यह बताता है कि अखिलेश के लिए आजम कितने महत्वपूर्ण हैं.

अब्दुल्ला रामपुर की स्वार विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे तो उनके पिता आजम खान जेल से ही अपनी पुरानी रामपुर विधान सभा सीट से ही चुनाव लड़ेगे.हालात यह है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव, अब्दुल्ला को प्रेस कांफ्रेस में अपने बगल में बैठाने से भी गुरेज नहीं करते हैं.

सपा प्रमुख के रूख को देखकर आजम खान के बेटे अब्दुल्लाह आजम के तेवर भी तीखे हो गए हैं. वह योगी सरकार के खिलाफ आक्रमक मुद्रा में आ गए हैं. हालांकि अब्दुल्ला जमानत पर छूठे हैं,लेकिन वह ऐसे रिएक्ट कर रहे मानों उन्होंने योगी सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी जंग जीत ली हो,जबकि अब्दुल्ला मुख्यमंत्री योगी के चलते नहीं जन्मतिथि में फर्जी बाढ़ा करके 2017 विधान सभा चुनाव लड़ने की वजह से गए थे.
फर्जी जन्मतिथि प्रमाण पत्र विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2018 को अब्दुल्ला आज़म को भ्रष्ट आचरण का दोषी माना था और उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी और जमानत देने से भी मना कर दिया था.

इस आदेश के खिलाफ अब्दुल्ला सुप्रीम कोर्ट गए, वहां अब्दुल्ला आजम खान को थोड़ी राहत मिली,अब्दुल्ला को जमानत नहीं देने की मांग वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है और उन्हें जमानत दे दी.

यहां यह बताना भी जरूरी है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट से ही अब्दुल्ला आजम खान को बड़ा झटका लगा था. सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान के निर्वाचन रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था.
 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में जेल में बंद सपा सांसद आजम खान की पत्नी डॉक्टर तंजीन फातिमा और उनके बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था. आजम खान करीब 11 महीने से अपने परिवार के साथ सीतापुर की जेल में बंद थे. उनकी पत्नी विधायक डा तंजीन फातिमा कुछ समय पहले ही जेल से छूटी हैं, अब सुप्रीम कोर्ट से उनके बेटे अब्दुल्ला को भी जमानत देकर राहत दे दी है.
जेल से बाहर आते ही अखिलेश ने अब्दुल्ला के सिर पर अपना हाथ रख दिया.अखिलेश के हाथ रखते ही अब्दुल्ला? योगी सरकार पर हमलावर हो गए हैं. गत दिनों रामपुर में समाजवादी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वो अपने पिता को याद करके रोने लगे.पिता आजम खान के साथ जेल में गुजारे गए 23 महीने का जिक्र करते हुए अब्दुल्लाह आजम भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.
वहीं आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के आंसुओं को सियासी बताते हुए आरोप लगा रहे हैं,जब समाजवादी सरकार में आजम दूसरों को रूलाते थे, सबको अपशब्द कहते थे,जल निगम में भ्रष्टाचार करते थे,महिलाओं के अंदरूनी कपड़ों का रंग बताते थे,अधिकारियों से जूते में पालिश करने की बात करते थे,जौहर वि0वि0 बनाने के नाम पर गरीब लोगों को डरा धमका कर उनकी जमीन की लिखा पढ़ी करा ली तब उन्हें क्यों नहीं रोना आया.

यदि तब अब्दुल्ला रोते तो शायद उनके पिता के पाप का घड़ा इतना नहीं भरता.आजम खान के बुरे दिन तब शुरू हुए जब प्रदेश में योगी सरकार बनी. जिन लोगों को आजम ने अपने रसूख से दबा रखा था,वह बाहर निकल कर उनके कारनामों का राजफाश करने लगे,इसके बाद योगी सरकार ने भी उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी.

उत्तर प्रदेश की सियासत में आजम खान कभी बहुत बड़ा नाम हुआ करता था, लोग उन्हें सुपर सीएम कहकर बुलाते थे. आजम की तुनकमिजाजी का यह हाल था कि कई बार उनकी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से भी खटपट हो जाया करती थी. आजम खान रामपुर से आते हैं और उन्हीं की वजह से रापमुर कई वर्षो से समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है। आजम खान यहां से नौ बार विधायक बने हैं।
2017 में जब भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ जीत हासिल की तो आजम खान ने भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को 47,000 मतों से हराकर अपनी रामपुर सीट बरकरार रखी थी। 2019 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और इस चुनाव में भी उन्हें जीत मिली। रामपुर विधानसभा सीट खाली करने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को उप-चुनाव लड़ाया। उन्होंने भी जीत हासिल की।

आजम खान पहली बार जनता दल (सेक्यूलर) से 1980 में इस सीट से विधायक बने। इस सीट पर उनकी बादशाहत लगातार 1996 तक कायम रही। इस दौरान उन्होंने लोक दल, जनता दल, जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया।  उत्तर प्रदेश की 13वीं विधानसभा के चुनाव में रामपुर सीट से अफरोज अली खान को जीत मिली थी।

इसके बाद फरवरी 2002 में फिर आजम खान ने की वापसी। वह लगातार 2019 तक इस सीट से विधायक बने रहे। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को इस सीट से चुनाव लड़ाया और वह तजीन फातिमा विधायक बनीं। 2019 के उपचुनाव में तजीन फातिमा को 79,043 वोट मिले थे। वहीं, बीजेपी के भरत भूषण के खाते में 71,327 मत आए थे। इस उपचुनाव में बीजेपी को फिर हार का ही सामना करना पड़ा।
भाजपा के यूपी की सत्ता में आने के बाद आजम के खिलाफ विभिन्न धाराओं में 100 से अधिक आपराधिक मामलों दर्ज किए थे,जिसके बाद फरवरी 2020 से वह जेल में बंद हैं। आजम की पत्नी तंज़ीन और बेटे अब्दुल्ला को भी जेल में रखा गया था, क्योंकि उन्हें उनका सह-आरोपी बनाया गया था। आजम खान की पत्नी तंज़ीन फातिमा दिसंबर 2020 में जमानत पर बाहर आईं।

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