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Presidential election results : द्रौपदी मुर्मू को सबसे ज्यादा वोट यूपी-महाराष्ट्र से, यशवंत सिन्हा को 3 राज्यों से एक भी वोट नहीं, जानिए राष्ट्रपति चुनाव नतीजों के 10 चौंकाने वाले फैक्ट

Presidential election results: देश को 15वां राष्ट्रपति मिल चुका है. द्रौपदी मुर्मू 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी. गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आए तो मुर्मू ने तीसरे राउंड में ही जीत हासिल कर ली. उन्हें हर राज्य से वोट मिले. मुर्मू को सबसे ज्यादा वोट यूपी-महाराष्ट्र तो सबसे कम पंजाब-दिल्ली से मिले. वहीं, विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को तीन राज्यों से एक भी वोट नहीं मिले. आइए जानते हैं राष्ट्रपति चुनाव नतीजों के 10 चौंकाने वाले फैक्ट…

1- राष्ट्रपति चुनाव के लिए 18 जुलाई को वोटिंग हुई थी. इसमें 99% वोट पड़े. 771 सांसद और 4,025 विधायकों ने वोट डाला था. छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, पुडुचेरी, सिक्किम और तमिलनाडु में 100% विधायकों ने वोट दिया था.

2- राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू 676803 मूल्य के वोट मिले, जबकि विपक्षी दलों के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 380177 मूल्य के वोट मिले. इस चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को को 64.04 प्रतिशत और यशवंत सिन्हा को 35.97 प्रतिशत वोट मिले.

3- दिल्ली और पंजाब से मुर्मू को सबसे कम वोट मिले. इसकी वजह ये रही कि दोनों ही राज्यों में आम आदमी पार्टी की सरकार है और AAP ने यशवंत सिन्हा के समर्थन का ऐलान किया था. वहीं, यूपी और महाराष्ट्र से मुर्मू को बंपर वोट मिले. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे को विश्वास मत में 164 विधायकों का समर्थन मिला था जबकि द्रौपदी मुर्मू को वहां 181 विधायकों का वोट मिला. शिवसेना के दोनों गुटों ने उन्हें वोट दिया और कुछ विपक्षी दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की.

4- राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी खेमे से 125 विधायक और 17 सांसदों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट किया. क्रॉस वोटिंग ने सिर्फ राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को ही झटका नहीं दिया बल्कि मोदी सरकार के विपक्षी एकता की संभावना की भी पोल खोल दी है.

5- कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी यूपीए के विधायकों ने मुर्मू को क्रॉस वोटिंग की. असम में 22, मध्य प्रदेश में 20, बिहार-छत्तीसगढ़ में 6-6, गुजरात-झारखंड में 10, महाराष्ट्र में 16, मेघालय में 7, हिमाचल में 2 और गोवा में 4 विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया.

6- यशवंत सिन्हा को अपने गृह राज्य झारखंड में 81 में से केवल 9 विधायकों के वोट मिले, जबकि द्रौपदी मुर्मू को अपने गृह राज्य ओडिशा में 147 में से 137 विधायकों के वोट हासिल हुए.

7- केरल में एनडीए का एक भी वोट नहीं था लेकिन वहां भी एक विधायक ने मुर्मू को वोट दे दिया. इस तरह मुर्मू को हर राज्य से वोट मिला जबकि यशवंत सिन्हा को आंध्र प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम से कोई वोट नहीं मिला.

8- पश्चिम बंगाल में बीजेपी के 77 विधायक जीत कर आए थे. 8 टीएमसी में चले गए. बाकी बचे 69 विधायकों को बीजेपी ने चुनाव से पहले होटल में बंद कर वोट डालने की ट्रेनिंग दी. वहां द्रौपदी मुर्मू को 71 विधायकों ने समर्थन दिया यानी दो वोट अतिरिक्त मिले.

9- एक सांसद के वोट का मूल्य 700 था. द्रौपदी मुर्मू को 540 सांसदों ने वोट किया, उस हिसाब से उन्हें 378000 वोट मिले. दूसरी तरफ यशवंत सिन्हा को 206 सांसदों के वोट मिले, उनके वोट का मूल्य 145600 रहा. 15 सांसदो के वोट रद्द हो गए, जिनके वोट का मूल्य 10500 था. द्रौपदी मुर्मू को देश भर 2284 विधायकों ने वोट दिया, जिनके वोटों का कुल मूल्य 298803 था, जबकि यशवंत सिन्हा को 1669 विधायकों ने वोट दिया जिनका कुल मूल्य 234577 रहा. कुल 38 विधायकों के वोटों को रद्द किया गया.

10 – 2017 में राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को 65.65 प्रतिशत और विपक्षी दलों की उम्मीदवार मीरा कुमार को 34.35 वोट मिले थे. हालांकि तमाम रणनीतियों के बावजूद इस बार एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 1.5 (डेढ़) प्रतिशत वोट कम मिलें हैं. बता दें कि देश में सबसे ज्यादा अंतर से जीत का रिकॉर्ड पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम है. उन्होंने 1957 के चुनाव में 98.4% वोटों के अंतर से चुनाव जीता था. मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 31.3% वोटों के अंतर से जीते थे.

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