जलालपुर, अम्बेडकर नगर। जनजाति दिवस के अवसर पर सोमवार को तहसील परिसर में आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) और विमुक्त जनजाति (डीएनटी) समाज के प्रतिनिधियों ने ब्लॉक अध्यक्ष लाल बिहारी निषाद के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।

ज्ञापन में कहा गया कि केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, कश्यप, तुरैहा, मांझी और रैकवार समेत कई उपजातियों के बीच ऐतिहासिक एवं सामाजिक समानता रही है। अलग-अलग राज्यों में इन समुदायों का सरकारी वर्गीकरण अलग होने से आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभों की स्थिति भी अलग है। प्रतिनिधियों ने आगामी जातिगत जनगणना में निषाद समाज की संबंधित पर्यायवाची उपजातियों की पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज कराने की मांग की।

ज्ञापन में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में निषाद समाज के योगदान और बलिदान का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले उनके पूर्वजों और शहीदों को इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका है।
उन्होंने शहीदों के गांवों को ‘आदर्श शहीद गांव’ घोषित करने तथा संबंधित परिवारों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा और शासन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज को उसके ऐतिहासिक योगदान के अनुरूप सम्मान और संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए।

