Maharajganj

ठौर के लिए खरीदते हैं ठिकाना: साहब बिक रहा फुटपाथ.

  • ठौर के लिए खरीदते हैं ठिकाना: साहब बिक रहा फुटपाथ.
  • नगर पंचायत में निर्धारित हाट नही, सरकारी भूमि पर अबैध कब्जा.
  • कोई रुपये ले रहा तो कोई सब्जी-फल लेकर लगवा रहा ठेला.

अभिषेक वर्मा हिन्दमोर्चा संवाददाता फरेंदा।

महराजगंज: आदर्श नगर पंचायत आनंदनगर में फुटपाथ भी बिक रहा है। सब्जी से लेकर अन्य सामान की बिक्री के लिए ठेला लगाने वालों को “कर” देना पड़ रहा है। कोई रुपये लेता है तो कोई सब्जी-फल के रूप में कर वसूल कर रहा है।

हर दिन घंटों फुटपाथ पर दुकान लगाने के लिए 50 से 100 रुपये प्रतिदिन का ठेले वाले हिसाब देते हैं। वसूली करने वाले कोई और नहीं है, बल्कि जिनके घर के सामने फुटपाथ पर बाजार सजती है, वे लोग ही है। इनके साथ ही वर्दी वालों पर भी वसूली के आरोप लगते रहे हैं। जब रेलवे स्टेशन, मीलगेट, अम्बेडकर तिराहा और विष्णुमन्दिर के आस पास ठेला वालों से बात की गई तो यह सच्चाई सामने आई एक ठेला लगाने वाले फल विक्रेता ने बताया कि अगर शिकायत करेंगे तो हटा दिए जाएंगे। रोजी-रोटी का सवाल है। यहाँ कई स्तर पर वसूली होती है, हम छोटे लोग हैं, “कर” देते और ठेला लगाते हैं

कस्बा में ठेला का स्थायी अड्डा होता तो इस प्रकार से जलालत नहीं झेलनी पड़ती। ऐसे में हर दिन “कर” देकर धंधा करते हैं। वसूली का खेल इसलिए चल रहा है कि कोई बड़े अधिकारियों से शिकायत करने वाला नहीं है।
फड़ और ठेला का अलग रेट है।

पांच किलोमीटर के दायरे में फैले शहर में एक भी स्थाई स्थान चिन्हित नहीं है, जहां पर स्थायी रूप से दुकान लगाकर धंधा करने वाले अपना गुजारा कर सकें। इसलिए वह शहर के फुटपाथ पर ठेला लगाकर दुकान चलाते हैं। चाहे वह सब्जी, खोमचा, फल या फिर अन्य सामान की बिक्री करता हो, जहां खड़े होकर ठेला लगाते हैं, वहां कब तक रहेंगे इसका कोई अंदाजा नहीं हैं।

कुछ खास जगहों के लिए देनी पड़ती है अधिक रकम:

जितनी घनी आबादी उतनी अधिक रकम अगर दुकान शहर के मध्य जैसे स्टेशन रोड, अम्बेडकर तिराहा,मीलगेट और विष्णुमन्दिर अन्य भीड़भाड़ वाले स्थान पर हैं तो खड़े होने का “कर” अधिक हो जाता है। क्योंकि यहां हमेशा बड़ी भीड़ रहती है। शाम चार बजे से रात आठ बजे बड़ी संख्या में लोग निकलते हैं। बिक्री अधिक होती है इसलिए इन स्थानों पर कुछ अधिक देना पड़ता है। अगर देने में कोताही किए तो तत्काल हटा देंगे, कल दूसरा दुकानदार खड़ा हो जाएगा इसलिए बिना कहे कोई महीने के हिसाब से रुपये देता तो कोई रोज का रोजी देता है ताकि कोई उनका ठिकाना न हथिया लें।

फुटपाथ पर ठेला लगाने वालों का हो रहा है शोषण:

यह एक दो नहीं, बल्कि शहर के पांच किलोमीटर के दायरे में फुटपाथ पर ठेला लगाने वाले 100 से अधिक लोगों के साथ हो रहा है जब धानीढाला नौगढ़ रोड़ पर हकीकत जानने की कोशिश की गई तो चौका देने वाली स्थिति सामने आई। एक चाट फुलकी की दुकान लगाने वाले ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यहां ठेला लगाने के लिए भी पापड़ बेलना पड़ा। क्योंकि आसपास अस्पताल व स्कूल हैं जिससे भीड़ रहती है।

नगर में स्थाई स्थान चिन्हित होने से दूर हो सकती है समस्या:

नगर के निवासी डॉक्टर रामनारायन चौरसिया ने कहा कि शहर बनने से आज तक फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों पर ध्यान नहीं दिया गया है। कभी अतिक्रमण के नाम पर हटाकर शोषण किया जाता है तो कभी घर के सामने से दुकान हटाने के लिए दबाव बनाने पर। लेकिन इनका भी कमाने खाने का हक है, कहां जाएं। अगर स्थाई स्थान नगर में चिन्हित हो जाए तो इनका समस्या दूर हो जाता।

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