Lucknow

NR लखनऊ मंडल यूनियन के दबाव में रेल मंत्रालय, रेलवेबोर्ड भ्रष्टाचारियों का बाल बांका नहीं , मीडिया के खबरों पर भरोसा नहीं रेल प्रशासन को भ्रष्टाचारियों के सिर पर बोलता जादू

लखनऊ /उ. रे. लखनऊ मंडल में एक ऐसा मामला आया सामने जिसमें यह दर्शाता है कि बिना घूसखोरी के कोई एक भी कार्य सम्भव नहीं हो पायेगा, उदाहरणार्थ ये दो पत्र दिनाँक 09 – 01-2023 का है जिसमें ये लिखा गया है कि 14 जनरल 1 पोस्ट आरक्षित कोटे की खाली है लेकिन जब पोस्टिंग का पत्र दिनाँक 19-01-2023 को निकाला गया तो उसमें मात्र 06 कर्मचारियों का ही प्रमोशन किया गया है ।

सूत्रों के अनुसार इसी लिए एक पत्र पहले निकाला नहीं निकलवाया गया था कि सभी कर्मचारी भाग कर यूनियन और अधिकारियों की शरण में आयेंगे जैसा कि इसके पहले भी डीजल शेड में कार्यालय अधीक्षक का पद ग्रेजुएट कोटे से होनी थी जिसके लिए दो -लाख रुपये एक यूनियन के पदाधिकारी ने लिया था लेकिन जब उसमें से एक कर्मचारी को पास नहीं करवाया जा सका और होहल्ला मचा। जिस पर नेता जी को पैसे वापस करना पड़ा था ।

इसलिए ये पुराना इतिहास है और ये तब खत्म हो सकता है जब ये यूनियन वालों के सम्पति की जाँच होगी क्योंकि ये सुधरने वाले नहीं है ये अधिकारियों की मिलीभगत से ही भ्रष्टाचार करते हैं और इनको अधिकारी बाद में बचा लेते हैं ।

एक रिटायर एपीओ के अनुसार आपको याद होगा कि इसी केस के संबंध में न्यूज/12-01-2023 को लखनऊ से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र में आई थी जिसमें य़ह भी लिखा गया था कि मुख्य लोको निरीक्षक के प्रोन्नति के पत्र में प्रमोशन और पोस्टिंग एक साथ किया गया था क्योंकि इसमें मोटी रकम यूनियन और अधिकारियों को प्राप्त हो गया था ।

अब आपको गौर से ये दोनों पत्रों को यदि देखेंगे तो इसमें और कई गडबड़ी आपको देखने को मिल जाएगी क्या ये जो बाबूजी और अधिकारी हैं वो घूस लेने के लिए ही आए हैं और घूस देकर ही पढ़ाई किए हैं गौर करने की बात है कि एक नंबर पर कर्मचारी को फैजाबाद से दिखाया गया है।

जब कि पहले पत्र में उसको लखनऊ में लिखा है वही चार के कर्मचारी को पोस्टिंग की तारीख एक दिन पहले की ही कर दिया है ऐसे अधिकारी को मंडल रेल प्रबंधक को चाहिए कि इनके लिए माननीय रेल मंत्री जी से पुरस्कृत करवाने के लिए अनुमोदित करना चाहिए और हो सकता है कि ये मंडल में पुरस्कार से सम्मानित किया गया होगा।

क्योंकि पुरस्कार के लिए भी नाम यूनियनों के ऑफिस में होता है और ज्यादातर कर्मचारी और यूनियन की दलाली करने के लिए मजबूर है। रेल सूत्रों के अनुसार इनकी कमाई और लूट खसोट का जरिया इन्हीं के रास्ते होकर जाती है ।

अब देखना है कि इस प्रूफ को देखकर भी माननीय रेल मंत्री जी जाँच करवाते हैं या 2024 के चुनाव के लालच में कुछ नहीं होगा ,चाहे ये रेल के नेता अपने टिकट के चक्कर में पार्टी ही क्यों न बदल लें जैसे अमेठी से चुनाव लड़ रहे आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास के लिए ऑन ड्यूटी कर्मचारियों को लेकर गए थे ।

ये तो ऐसे नेता हैं जब से रिटायर हुए हैं पार्टी टिकट के चक्कर में लगभग सभी पार्टियों में जोर अजमा चुके हैं अब एक बड़ी पार्टी के एक बड़े कद्दावर नेता जी के चरणों का अरदास लगाते हुए छोटे छोटे कार्यक्रमों में शामिल होते हैं ll

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