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NR लखनऊ मंडल चारबाग का हॉस्पिटल बना अवैध वसूली का अड्डा, फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र के नाम पर चल रहा खेल

  • NR लखनऊ मंडल चारबाग का हॉस्पिटल बना अवैध वसूली का अड्डा, फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र के नाम पर चल रहा खेल

लखन्ऊ / उत्तर रेलवे मंडल हास्पिटल के काले कारनामें। मंडल आफिस से लेकर बङौदा हाऊस तक फैला हुआ है लेकिन इस पर रेलवे के किसी भी अधिकारी की निगाहें ईनायत नहीं हो रही है और उत्तर रेलवे न्ई दिल्ली बङौदा हाऊस महा प्रबंधक कार्यालय का कार्मिक विभाग मृग मारीचिका साबित हो चुका है।

मिली जानकारी के अनुसार यूनियन और मंडल हास्पिटल चारबाग के वरिष्ठ चिकित्सक गंठजोङ के नये-नये काले कारनामें आये दिन देखे जा सकते हैं लेकिन रेलवे बोर्ड इनके आगे नतमस्तक साबित हो चुका है। आईए बताते चलें कि पिछले अंक में मेडिकल अनफिट के नाम पर अवैध वसूली में मंडल अस्पताल के अधीन लोको चारबाग के अस्पताल का एक लिपिक
जिसका नाम वीके मिश्रा है उसके काले कारनामें आ चुका है।

रेलवे के कार्मिक विभाग का एक अधिकारी (रिटायर) ने बताया कि ये यूनियन के नेता एवं चिकित्सक मिलकर रेल कर्मी को जब फर्जी बीमारी दिखाकर मेडिकल बोर्ड में अनफिट करवा देते हैं तो फिर उनको। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के आदेश की एक पत्र कार्मिक विभाग डी आर एम आफिस को जाता है।

वहां क्ई वर्षो तक सुपरन्यूरेरी के अधीन हर तीसरे बुधवार को बुलाया जाता है और अप्रूवल के लिए एक पत्र महा प्रबंधक कार्यालय न्ई दिल्ली को भेजा जाता है जो कई -कई माह तक फाईल वहां कार्मिक विभाग में पङी रहती है और संबधित। रेल कर्मी को हर माह पूरा वेतन कार्मिक विभाग द्बारा भुगतान किया जाता है।

जब किसी का आदेश भी मान लीजिए होता है किसी पद पर तो संबधित रेलकर्मी बाबू से सांठ गांठ करके मनचाहा रिफ्यूजल दे देता है और फिर घर बैठे वेतन लेता रहेगा।

रेलवे के अधिकृत सूत्रों ने बताया कि यह भ्रष्टाचार का खेल क्ई वर्षो से अनवरत जारी है और अधिकतर इस खेल में आरपीएफ एवं रनिंग के रेल चालक अथवा रेलवे गार्ड शामिल हैं, जिसके लिए मुंह मांगी रकम कटेगरी चेन्ज के लिए मेडिकल बोर्ड एवं यूनियन को देते हैं और इसमें वीके मिश्रा जैसे एक दर्जन चिकित्सक एवं बाबू शामिल बताये जाते हैं।

यदि इसकी जांच सीबीआई करे तो सैकङों रेल कर्मियों को फर्जी मेडिकल अनफिट कराकर बाबू के पद पर नियुक्ति यूनियनों द्बारा कराया गया है का पर्दाफ़ाश होगा और जिसमें कुछ तो अस्पताल में ही बाबू बन गये हैं तो बाकी डी आर एम आफिस एवं आलमबाग डीजल शेड में मलाई काट रहे हैं डियूटी के नाम पर नगण्य हैं।

बताया जाता है कि दो ऐसे लोको निरीक्षक हैं जो दिन भर नेतागिरी करते हैं और रेलवे के अधिकारियों एवं सरकार के खिलाफ रेल कर्मियों को यूनियन के नाम पर भङकाते हैं। कटेगरी चेन्ज का मुख्य कारण ये है कि आफिस में कार्य करने पर ऊपरी कमाई असीमित है और इनको रनिंग का30%का लाभ बेसिक पे में
सरकार देती है ।अगर इसकी जांच निष्पक्ष हो तो एक दर्जन चिकित्सक एवं रेलवे के अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

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