Lucknow

NR लखनऊ मंडल आलमबाग डीजल शेड रखे करोड़ों रुपए का कबाड़ खा रहा जंग, रेल माफिया और पुलिस बेचकर हो रहे मालामाल

ओपी सिंह वैस

लखनऊ । जहां केन्द्रीय सरकार/रेल मंत्रालय भारत सरकार अपनी आय बढाने के लिए तरह -तरह से हथकंडे अपना रही है तो वहीं उरे लखनऊ मंडल के केवल आलमबाग डीजलशेड में ही करोङों का कबाङ खुले आसमान
के नीचे मिट्टी खा रही है और कुछ तथा कथित रेल माफिया एवं पुलिस कबाङ को हजम करने में कोई कोर कसर नहीं छोङ रहे हैं।

लाखों का कबाङ अवैध ढंग से कबाङियों द्वारा औने-पौने दामों में इन चंद पुलिस एवं रेल कर्मियों से खरीदकर मालामाल हो रहे हैं और रेलवे के अधिकारियों के आंखों पर या तो पर्दा पङा हुआ है या फिर इन लोंगों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ रही है। रेलवे के एक अधिकृत सूत्र ने बताया कि कांग्रेस के शासन काल में तत्कालीन रेलमंत्री
लालूप्रसाद यादव ने पूरे रेलवे में केवल कबाङ नीलाम करके रेलवे को लाभान्वित कर दिया था।

मिली जानकारी के अनुसार आलमबाग डीजलशेड में ये फोटो ही काफी है रेल अधिकारियों की पोल खोलने के लिए। ज्ञात हो कि आलमबाग डीजलशेड उस समय मीडिया की सुर्खियों में आया जब करोङों का डीजल रेल माफियाओं द्वारा डकार लिया गया और एक टैंकर डीजल आपसी लेन-देन में सौदा न पटने के कारण रंगे हाथ पकङवा दिया गया।

उक्त आरोप की सबसे बङी सत्यता तो ये है कि 28/7/21को टैंकर पकङा गया और तीन दिन तक कोई भी एफ आई आर रेल प्रशासन की तरफ से नहीं कराया गया और जब मामला “हिन्दमोर्चा” अखबार में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ तो रेल अधिकारियों में हङकंप मचा और 30/7 को एफ आई आर दर्ज हुई यानी कि तीन दिन क्यों रोंका गया ये जांच का विषय है।

साथ ही साथ लोको निरीक्षक भगवान सिंह मीणा सहित आधा दर्जन लोगों को जेल की हवा खानी पङी और नौकरी से हाथ धोना पङा। अब इस फोटो से खुद अंदाजा लगा सकता है कि आलमबाग डीजलशेड में करोङों का स्क्रैप यार्ड में पङा हुआ है और आये दिन कुछ तथाकथित पुलिस कर्मियों एवं रेल कर्मियों की मिलीभगत से माल को गायब किया जा रहा है.

ये तो हुई केवल सीडीएम्ई आलमबाग की बात, और दूसरे सीडीएम्ई जो ट्रेन में बेडरोल उपलब्ध कराता है कितना भ्रष्टाचार है कि धुलाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति होती है जो लखनऊ मेल को छोङकर बाकी सभी ट्रेनों में आये दिन शिकायत हो रही है लेकिन आज तक कोई भी कारवाई इन अधिकारियों के द्बारा नहीं की गयी है।

आईए लखनऊ मंडल के तीसरे सबसे तेजतर्रार एवं ईमानदारी का चोला पहने सीडीएम्ई O&F के बारे में बताते हैं ये ऐसे अधिकारी हैं जो अपने खास चहेते लोको निरीक्षक अजय कुमार गोंङ से मिलकर सभी ठेकों में भ्रष्टाचार की नींव डाल दिया है जो जिस सीट पर लगे हुए हैं बिना लक्ष्मीनिया के कोई कार्य नहीं होता। रेलवे के एक सूत्र ने बताया कि रेलवे मैकेनिल विभाग में एक कहावत है कि जहां मलाई नहीं तो वहाँ एलआई नही।

आजकल रनिंगरुम में टेन्डर से लेकर इम्प्रेस्टमनी आदि का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है जो सामान ठेके से मिलना चाहिए उसे कैश से खरीदा जा रहा है, साथ ही साथ ठेकेदारों के आदमियों को जानबूझकर वेतन में कटौती करते हैं इसके बाद पूरे माह का हाजिरी लगाने के लिए कमीशन के तौर पर अच्छी खासी मोटी रकम ठेकेदारों से ऐंठी जा रही है.

क्योंकि ठेकेदार अपने कर्मचारियों को 12 घंटे की डियूटी पर प्रतिमाह 7500 देता है और रेलवे से 18000 से 20000 के मध्य, जो भी एलआई आफिस में लगे हुए हैं इनको कंप्यूटर की जानकारी पूर्णरुप से नहीं है सभी कार्यो के लिए इनके साथ सहायक लोको पायलट को लगाया गया है।

सूत्रों के अनुसार उक्त अधिकारी को खुद कंप्यूटर की पूर्ण जानकारी नहीं है और इसीलिए ये अपने निहित स्वार्थ के लिए सहायतार्थ सेवा लेते हैं और देते हैं चाहे वे कमीशन के रुप में अथवा अवैधानिक ढंग से माईलेज लेकर फर्जी तरीके से आफिस में कार्य करना हो। अब तक जो भी जांच होती है इसमें जेबें गरम करके मामले को रददी की टोकरी में डाल देते हैं।

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