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मुस्लिम नीति लोकतंत्र के लिए घातक…

अरविन्द शर्मा-वरिष्ठ पत्रकार

यूं तो देश में धर्म परिवर्तन के लिए ईसाई मिशनरियों को प्रत्यक्ष दोषी ठहराया जाता रहा है। बौद्ध धर्मावलंबी अपने धर्म विस्तार के लिए तेजी से आगे बढ़ते जा रहे हैं किन्तु मुस्लिम धर्मावलंबियों की नीति इन सबसे ज्यादा खतरनाक है। वैसे इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इस्लाम के समर्थक भारत को लूटने के इरादे से जब आगे बढ़े तो उन्होंने लूट पाट तो की ही, साथ में मूर्तिपूजकों को गुलाम बनाया।

इनकी महिलाओं और बच्चियों की इज्जत को तार-तार तो किया ही, गुलामों की संख्या ज्यादा बढ़ने पर एक साथ लाखों में कत्लेआम भी किया। वह एक अलग युग था किंतु आज 21वीं सदी में हम हैं और उस समय जो काम यह ताकत के बल पर करते थे आज बड़ी गहरी साजिश वाली नीति से कर रहे हैं।

मुस्लिमों की साजिश और हिंदुओं में जातीय श्रेष्ठता की नीति, लोकतंत्र के लिए घातक होती जा रही है क्योंकि लोकतंत्र सामाजिक विकास की नीति पर आगे बढ़ता है। लोकतंत्र प्रति व्यक्ति के विकास की अवधारणा पर निर्भर करता है। वर्तमान स्थितियों में लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी धर्मों के लिए समान अवसर सामान छूट और सामान सिद्धांत का प्रतिपादन करना होगा।

जिस तरह क्रिश्चियन बौद्ध और मुस्लिम धर्म स्वयं को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित होते हैं, उसी तरीके से हिंदुत्व को भी आगे बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा, तभी यह लोकतंत्र बच पाएगा। सभी धर्म स्वयं के विस्तार के लिए साफ्ट टारगेट हिंदुत्व को ही पाते हैं। क्रिश्चियन आर्थिक अक्षमता को निशाना बना रहे हैं तो बौद्ध जातीय उपेक्षा को, जबकि मुस्लिम इनके परिवारों को ना टच करके इनकी लड़कियों को टच कर रहे हैं।

यह वैसे ही है जैसे मोतियों के ढेर में से एक सबसे कीमती मोती चुपचाप निकाल लिया जाए तो देखने वालों को कोई फर्क नहीं महसूस होगा लेकिन वास्तव में सबसे कीमती निकल चुकी होती है। एक हिंदू लड़की को अपने पाले में कर लेने का फायदा यह होता है कि उसकी वंशवेल हिंदुत्व में समाप्त हो जाती है जबकि मुस्लिम में बढ़ती जाती है यानी हिंदुओं की संख्या कम हो जाएगी और मुस्लिमों की उसकी अपेक्षा ज्यादा तेजी से बढ़ती जाती है।

मुस्लिम लड़कों के पीछे आकर्षित हो रही हिंदू लड़कियों की उम्र और मुस्लिम लड़कों द्वारा हिंदू नाम रखना और उनके पास उपलब्ध प्राथमिक स्तर का धन प्रमुख भूमिका निभाता है। 17 से 30 जब हिंदू लड़के पढ़ाई को वरीयता देते हैं उसी उम्र में मुस्लिम लड़के छोटा-मोटा काम धंधा करके अपनी पॉकेट खर्च से ज्यादा कमा लेते हैं और हिंदुत्व के नाम का चोला ओढ़कर अपने कार्यक्षेत्र पास पड़ोस या अन्य स्थानों पर उपलब्ध हिंदू लड़कियों को आकर्षित करने में सफल हो जाते हैं.

इसी वक्त पर लड़कियों की उम्र व शारीरिक संरचना उनके आकर्षण के जाल में फंसने के लिए पर्याप्त कारण बना देती है। यदि मामला आगे बढ़कर पुलिस तक भी पहुंच जाता है तो भारत का कानून बालिग होने के कारण उनका सहायक ही बन जाता है रही सही कसर धार्मिक स्तर पर मुस्लिम धर्म विस्तार की नीति व धर्म के ठेकेदार पूरा कर देते हैं। हर स्तर पर मुस्लिम लड़कों को मुस्लिम धर्मावलंबी सहयोग प्रदान करते हैं।

मुस्लिम साथ में आक्रामक भी होते हैं यह सब इनके कृत्य हिंदुओं में हिंदुत्व की भावना जगाने के लिए पर्याप्त कारण है। जिसकी वजह से भारत के मतों का ध्रुवीकरण आसानी से हो जाता है। देश में मत शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार बेरोजगारी के आधार पर नहीं तय होता वरन मुस्लिमों की आक्रामक नीति, इनके द्वारा किए गए व्यवहार और इनके कृत्य के द्वारा तय हो जाता है। निश्चित ही मत का यह आधार लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो रहा है। स्पष्ट रूप से वर्तमान सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी धर्मावलंबी हो, वह अपने नाम से किसी को धोखा ना दे पाए।

काम धंधे या अन्य क्रियाकलाप में ऐसा कुछ ना करे जिससे कि उसकी वास्तविकता छिप जाए। मुस्लिमों के द्वारा रखे जा रहे नाम सोनू मोनू गुड्डू चंचल गौरव आदि आदि भ्रम पैदा कर देते हैं और तमाम प्रतिष्ठानों पर बालाजी हनुमान या अन्य हिंदुत्व नाम लोगों को गुमराह करते हैं जो कि नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र बचाए रखने के लिए मुस्लिमों को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना होगा अन्यथा यह पूर्व काल नहीं है 21वीं सदी है और हिंदुत्व जाग गया तो उनके लिए समस्याएं ही समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी।

वैसे हिंदुत्व के धार्मिक स्थलों को भी अपनी भूमिका का वास्तविक निर्वहन करना होगा। इन्हें सरकार पर दबाव बनाना होगा कि शादी की उम्र 18 से 25 तय की जानी चाहिए साथ में एक नई विधा का सूत्रपात करना होगा कि लड़कियां मायके में नहीं ससुराल में अपनी पढ़ाई पूरा करें और अपनी शौक भी, यदि ऐसा करने में हिंदुओं के धार्मिक स्थल स्वयं को सक्षम नहीं पा रहे हैं तो उन्हें हिंदू लड़कों को पर्याप्त सहयोग और आवश्यक होने पर आर्थिक समर्थन भी करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो लोकतंत्र विकास के पथ पर ना आगे बढ़कर हिंदुत्व के बहुमत को बचाने के लिए काम करेगा।

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