Wednesday, May 18, 2022
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प्रार्थना आत्मा का सात्विक भोजन है

स्नेहा दुधरेजीया पोरबंदर गुजरात

“संसार के सभी धर्मों में एक बात समान है
वह है नेक प्रार्थना। प्रार्थना किसी भी मनुष्य के जीवन के लिए एक बड़ी साधना है।

प्रार्थना आत्मा का सात्विक भोजन है ,जिस प्रकार हमें जीवन जीने के लिये आहार कि जरुरत होती है,उसी प्रकार जीवन को सार्थक बनाने के लिये हमें “प्रार्थना”की जरूरत होती है।प्रार्थना क्या है? प्रार्थना मन की वो शक्ति है जो अंधेरे में प्रकाश का काम करती है।प्रार्थना की शक्ति हमारे जीवन में उस समय साथ देती है जब हम मुश्किल में होते है ।

मंदिर जाना, पूजा अर्चना करना ,दीप जलाना, यज्ञ करना, प्रदक्षिणा करना मन को शांति देता है अन्तरात्मा को तृप्त करता है….वैसे ही रामकार्य जैसे नेक कार्य करने से परमात्मा खुश होते है ,प्रत्येक जीव के प्रति दयाभाव रखना ,जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता करना ,भुखे व्यक्ति खाना खिलाना ,गरीबों को यथाशक्ति दान देना जैसे नेक कार्य करने से परम कृपालु परमेश्वर खुश होते है।

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प्रार्थना और रामकार्य दोनों ही हमें जीवन में सुख और शांति प्रदान करते है ,हमारे जीवन में आनेवाली हर मुश्किल से हमें बाहर निकालते है।
प्रार्थना से मन मजबुत होता है । आत्मविश्वास और हौसले को बल मिलता है ।प्रार्थना से ईश्वर का साथ मिलता है। जिससे व्यक्ति का मन मजबूत होता है , व्यक्ति का मनोबल भी उतना ही मजबूत होता है।

जैसे वास्तविक दुनिया में एक कोर्ट है

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सबको न्याय दिलाने के लिए वैसे एक कोर्ट कुदरत की भी होती है।वास्तविक दुनिया की कोर्ट में झूठ बोलकर या ग़लत तरीके से मुकदमा जीता जा सकता है । काले कोट वाला वकील गलत तरीके से मुक़दमा जीता सकता है? मगर कुदरत की कोर्ट में ऐसा नही होता है ,वहां पर सच्चाई चलती है ,वहां जुठ के लिये कोई जगह नही होता है।

कुदरत की कोर्ट में अदृश्य दुनिया में रहनेवाली आत्माओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उसमें प्रार्थना भी और प्रार्थना करनेवालों का ही प्रमुख व महत्वपूर्ण स्थान होता हैं।

जैसे वास्तविक दुनिया में अच्छी और बुरी दोनों आत्मा है,वैसे अदृश्य दुनिया में भी अच्छी और बुरी दोनों आत्मा होती है । मनुष्य के हर नेक कार्य अदृश्य दुनिया में रहनेवाली आत्माएं करती है । वातावरण भी अनुकूल वही बनाती है।

मनुष्य के कर्म और प्रार्थना के हिसाब से वह फल देती है।अच्छे कर्मो का फल अच्छा मिलता है। मनुष्य के सभी कर्म का हिसाब वही होता है।
जिनके पास नेक कर्मों का बैलेंस जितना होता है, वो व्यक्ति उतना ही धनवान और चरित्रवान होता है एवं अच्छे कर्म के कारण वो परमात्मा के दरबार में स्थान पाता है, और सब सुखों को भोगता है ।परम धाम को पाता है।

अच्छी सोच मन को अच्छे काम करने के लिये प्रेरणा देती है । अच्छे काम कि प्रेरणा कहां से मिलती है ?? निश्चित ही अच्छे स्थानों से ,अच्छे लोगों की संगति से मिलती है।अच्छे पुण्यआत्मों के बीच रहने से, अच्छी सोच, अच्छे विचार अच्छे कर्म ,नेक मार्गदर्शन सब मिलता है।जीवन रुपी नौका ठीक से चलाकर अपना जीवन सार्थक करने की प्रेरणा मिलती है।

जीवन जीने के लिये जिस प्रकार भोजन जरुरी है उसी प्रकार प्रार्थना भी जरुरी है ।
हमारे जीवन को सफल सार्थक बनाने के लिए प्रार्थना जरुरी है। जिस प्रकार हम बाथरुम मे बैठ कर खाना नही खा सकते है ,खाना भी हम साफ जगह पर बैठ कर ही खाते है,वैसे ही खाना बनाते समय और खाना खाते समय अच्छे विचारों का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान होता है ।अच्छे विचारों के साथ बना भोजन ,मन और मस्तिष्क दोनों को तृप्त करता है।

भगवान का ध्यान करते हुए प्रर्थना गुनगुनाते हुए भोजन बनाना श्रेष्ठ रहता है।
भोजन बनाते समय हमारी भावना का भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान होता है । हम भोजन बनाते समय भगवान का संकीर्तन करते हुए भोजन बनाएंगे तो आसपास का वातावरण शुद्ध बनता है।
आसपास की खराब आत्मा दुर होती है, और रहती भी है तो उनकी ख़राब दृष्टि का कोई भी नेगेटिव प्रभाव पड़ता नहीं है न ही हमारे भोजन पर और ना हम पर ।

उसी प्रकार प्रार्थना भी सही जगह करने से बेहतर फल मिलता है। प्रार्थना कि भी जगह होती है ,स्थान होता है कुछ प्रार्थना जल्दी फल देती है पर उस में भी जगह का महत्व होता है।

प्रार्थना से हमे अच्छे विचार आते है ,और अच्छे काम करने कि प्रेरणा मिलती है ।कई बार हम रामकार्य तो करते हे। पर उनका फल नही मिलता है पर जो रामकार्य करते हुवे अगर हम ॐ ह्लीं नमः स्वाहा सिद्धी मंत्र का प्रयोग करे तो हमारी प्रार्थना सीधे ही भगवान तक पहुंच जाती है ,स्वाहा देवी द्वारा । रामकार्य कार्य करके हमारे मन को भी मजबूती मिलती है

रामकार्य क्या है ?

रामकार्य वह है जो भगवान के भरोसे,व आस रखकर बैंठी आत्माओं को भोजन करवाने जैसा नेक कर्म है।आप भगवान के गण बनाकर जाओगे भोजन करवाएंगे जिससे आपका कर्म का बैलेंस बढ़ेगा। यदि आप नेक कार्य करते है तो आप भगवान का काम करते है , वही भगवान आपका काम करते हैं।

कोई भी भगवान का नाम या मंत्र बोलकर अंत में सिद्धी मंत्र बोलकर भगवान के भरोसे आस रखें जीवों को भोजन करवाना बड़ा महान कार्य कहा गया है। रामकार्य मतलब भगवान का कार्य ।
कोई जीव आस रखकर बैठा है कि, कब मेरे देवी देवता भगवान गुरुदेव आएंगे और हमें तृप्त करेंगे, भोजन करवाएंगे और तब हम उनके गण बनकर, हम उस जीव को भोजन करवाकर तृप्त करते हैं तब ,वो जीव भी दिल से शुभ आशीर्वाद देता है, और उनका आशीर्वाद नेक होता है ,कल्याण कारी होता है ,और रामकार्य करने से जीवों के साथ साथ अपने आराध्य देवी देवता का भगवान का भी आशिर्वाद प्राप्त होता है।

क्योंकि हमनें रामकार्य करते समय भगवान के भरोसे आस रख रहे जीवों को भोजन कराते समय हमने देवी देवता भगवान के नाम मंत्र स्तुति और अंत में सिद्धी मंत्र बोलकर नेक कर्म किया है, भगवान का कार्य किया है, इस लिए भगवान हमारा नेक कार्य जरूर करते है। नेक कार्य अदृश्य दुनिया में रहनेवाली नेक आत्मा करती है ।

जब हम रामकार्य करने के बाद अपने कल्याण के लिए भवसागर पार करने के लिए राष्ट्र हित के लिए, जनहित ,धर्मरक्षा के लिए, अपने माता-पिता प सर्वपितृ के लिए जब हम प्रार्थना करते हैं, वो प्राथना ॐ उच्चारण से हमारी प्रार्थना का आवाज ऊपर जाता है, ह्लीं बीज मंत्र द्वारा भगवान माया का सर्जन करते हैं, और ह्लीं बीज मंत्र द्वारा भगवान हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचाते है।

धन की कमी कभी नहीं आने देते और अंत में हम स्वाहा देवी का ॐ ह्लीं नमः के साथ उच्चारण करते है ,तब हमारा संदेश, हमारा नेक कर्म और हमारी नेक प्रार्थना भगवान तक स्वाहा देवी पहुंचाती है।

तब जाकर हमारे कार्य होते हैं । हमारी प्रार्थना से हमारे साथ साथ अदृश्य दुनिया में रहनेवाली आत्माओं का भी कल्याण होता है, क्योंकि अदृश्य दुनिया में रहनेवाली आत्माओं का भोजन ही प्रार्थना है। हम नेक और सही प्रार्थना करते हैं तो वो आत्मा हमारी सच्चे भाव से मनसे कि प्रार्थना सुनती है ,और हमारा नेक कार्य करने के लिए वातावरण बनाने में लग जाती है।

जब हमारा नेक काम होता है तब, भगवान को यश देते हैं भोग चढ़ाते है तब भगवान अपने योग साधना से देखते हैं ।वे सोचते है कि,यह जीव का ऐसा क्या हुआ जिससे आज हमें भोग प्रसाद चढ़ा रहा है , उसका नेक काम क्या था सही या ग़लत और वो किसने किया ,कैसे किया, प्रार्थना सही थी या ग़लत, सब कुछ देखकर भगवान परमेश्वर सत्य भगवान पारब्रह्मापितामह भगवान अदृश्य दुनिया में रहनेवाली आत्माओं का कल्याण करते है सही नेक कार्य काम करने पर ।

हमें नेक प्रार्थना इस लिए भी करनी चाहिए जिसमें हमारे साथ साथ राष्ट्र का भला हो। धर्म की रक्षा हो, प्राणीमात्र का कल्याण हो ।
ऐसी नेक कर्म वाली प्रार्थना ही मनुष्य को करनी चाहिए रामकार्य करने के बाद और उसमें संकल्प के साथ और गाय के घी से दीप जलाकर भगवान के सामने या अच्छे घामपर ,अच्छे पवित्र स्थानों पर करना श्रेष्ठ उतम रहता है । और संकल्प के साथ किया कर्म बहुत पावरफुल बन जाता है ।

कहने का मतलब यह है कि, सही जगह और सही प्रार्थना से हम अपने जीवन को बदल सकते है। हमारे आसपास के वातावरण मे भी बदलाव ला सकते है।जिंदगी एकबार मिलती है तो, क्यों ना हम अच्छे कर्मो को करके हम ,हमारा जीवन धन्य बनाएं।

अच्छी प्रार्थना करके मन को मजबूत बनाकर जिये और जिंदगी को बेहतरिन बनाये। और पंचतत्वो से बनी इस काया में प्रार्थना रुपी पेट्रोल भरते रहे। और इस दुनियां से परे एक और दुनियां है ,उनका आशिर्वाद लेकर जीवन को सार्थक बनाये। न जाने कल क्या हो जो आज है वही पल को जिये । तभी तो संत-महात्मा विद्वानों ने कहा है प्रार्थना आत्मा का भोजन सात्विक है।
अस्तु

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