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आतंकवाद का एक मात्र हल राष्ट्रवाद है

सुनीता कुमारी पूर्णियां बिहार

हमारा देश कई दशक से से आतंकवाद की समस्या से परेशान है।देश में दूसरी अन्य समस्याओं की तरह आतंकवाद भी जटिल समस्याओं में से एक है।भारत सरकार की सतर्कता की वजह से आतंकवादी हमले कम जरुर हुए है मगर , अब भी आतंकवाद से पूरी तरह से निपने में भारत सरकार के पसीने छूट रहे है।

हमारे देश में प्रत्येक वर्ष न जाने कितने मासुमों की जान

आतंकवादी ले लेते है। आए दिन छोटे बड़े आतंकी हमले होते ही रहते है और इन सब से निटने में कितने ही सैनिक वीरगति को प्राप्त हो जाते है।सैनिको के परिवार पर मुसीबत आ जाती है ,जिसे सोचने मात्र से भी रोंगटे खड़े हो जाते है ,मन सोचने पर मजबूर हो जाता है कि, “आखिर क्यों इंसान ही इंसान के खून का प्यासा?”

“क्यो??धर्म और संप्रदाय के नाम पर आतंकवादी एक और धर्म चला रहे है जिसे वहशीधर्म, अमानवता धर्म, राक्षस धर्म की संज्ञा दी जा सकती है।असुरी प्रवृति से लिप्त ये आतंकवादी सिर्फ और सिर्फ निर्दोष इंसान की ही जान लेते है।”

भारत में अबतक कितने ही, बड़े आतंकी हमले अलग-अलग राज्यो में चुके है।
मुंबई का सीरियल धमाका भूला नही जा सकता है, जिसके पीछे डी कंपनी का हाथ था। इस हमले में 257 लोगों की मौत हुई थी।

14 फरवरी 1998 कोयम्बटूर में इस्लामिक ग्रुप अल उम्माह ने कोयंबटूर में 11 अलग-अलग जगहों पर 12 बम धमाके किए थे, इसमें 60 लोगों की मौत हो गई थी।3 नवंबर, 1999 को  श्रीनगर के बादाम बाग में हुए आतंकवादी हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे।

जम्मू कश्मीर विधानसभा भवन पर  1 अक्टूबर 2001 को जैश ए मोहम्मद के 3 आत्मघाती हमलावरों ने बम हमला किया, इसमें 38 लोग मारे गये थे।

अक्षरधाम मंदिर पर हमला पर भी 24 सितंबर 2002 में लश्कर और जैश ए मोहम्मद के 2 आतंकी मुर्तजा हाफिज यासिन और अशरफ अली ने हमला किया था जिसमें 31 लोग की मौत हुई थी।

22 जुलाई, 2003 को जम्मू कश्मीर के अखनूर में हुए आतंकी हमले में 8 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। दिल्ली में 29 अक्टूबर 2005 में आतंकियों ने 3 बम धमाके किए थे । 2 धमाके सरोजनी नगर और पहाड़गंज, तीसरा धमाका गोविंदपुरी में एक बस में हुआ। इसमें कुल 63 लोग की मौत हो गई थी।

11 जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में अलग-अलग 7 बम विस्फोट हुए। सभी विस्फोटक फर्स्ट क्लास कोच में बम रखे गए थे। इन धमाकों में मुजाहिदीन का हाथ था, इसमें कुल 210 लोग मारे गए थे और 715 लोग जख्मी हुए थे।महाराष्ट्र के मालेगांव में 8 सितंबर, 2006 को हुए तीन धमाकों में 32 लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हुए।

5 अक्टूबर 2006 श्रीनगर में हुए हमले 7 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए।

समझौता एक्सप्रेस में 19 फरवरी, 2007 को हुए धमाके में 66 यात्री मारे गए। आंध्रप्रदेश के हैदराबाद में 25 अगस्त, 2007 को हुए धमाके में 35 मारे गए। उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी, 2008 को रामपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैंप पर हुए हमले में आठ लोग मारे गए।
गुलाबी नगरी जयपुर में 13 मई 2008 में 15 मिनट के अंदर 9 बम धमाके हुए।

इन धमाकों में कुल 63 लोग मौत हो गई थी।अहमदाबाद में 26 जुलाई, 2008 के दिन दो घंटे के भीतर 20 बम हुए थे जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गए। इंफाल में 21 अक्टूबर, 2008 को मणिपुर पुलिस कमांडो परिसर पर हुए हमले में 17 लोगों की मौत हो गई।

राजधानी गुवाहाटी में 30 अक्टूबर 2008 को विभिन्न जगहों पर कुल 18 धमाके आतंकियों द्वारा किए गए। इन धमाकों में कुल 81 लोग मारे गए जबकि 470 लोग घायल हुए।

2016 का उड़ी हमला, आदि अनेको बड़े आतंकवादी हमले भारत पर हो चुके है जिन्हे अंगुलियों पर गिनना अब मुश्किल हो रहा है। अभी हाल का पुलवामा हमला जेहन से निकला भी नही है कि,जम्मू-कश्मीर में अभी भी छोटे बड़े आतंकवादी हमले आए दिन होते ही रहते है।
जबतक अकेले भारत आतंकवाद से परेशान था, तबतक विश्व समुदाय इसे हल्के में ले रहा था। परतु हाल के दो दशक से आतंकवाद पुरे विश्व की समस्या बन चुकी है।

विश्व के अनेक ऐसे देश हैं, जो आतंकवाद की समस्या से परेशान हैं। पुरे विश्व में आतंकी संगठन कुकुरमुता की तरल फैल रहा है,जिसे रोकना प्रत्येक देश की जिम्मेदारी बन चुकी है।इस समस्या के समाधान का बस एक ही हल है “राष्ट्रवाद” देश के प्रत्येक नागरिक को चाहे वो एक मंत्री हो या मजदूर, सब को देश के प्रति समर्पित होना होगा तभी आतंकवाद से लड़ा जा सकता है देश ,मे घुसने से पहले ही उसे रोका जा सकता है।

पूरे विश्व में आतंकवाद एक गंभीर विषय बन चुका है ।
हिज-उल-मुजाहिउद्दीन,अलकायदा,जैश-ए-मोहमद,
लश्कर -ए-तोयबा,अल ,बदर,हक्कानी नेटवर्क,

तालिबानी, अल इस्लामी ,लश्कर-ए-जब्बार ,नदीम कमाडों आदि रोज नए नए नाम आतंकी संगठनों के सुनने को मिल रहे है। सभी आतंकी संगठन मौके की तलाश में रहते है कि, कब और कैसे आतंक को फैलाया जाए??कैसे लोगों को डरा धमकाकर,लोगो को अपने इशारो पर नचाया जाए। जिसका ताजा उदाहरण अफगानिस्तान है।

ज्यादातर आंतकी संगठन धर्म और संप्रदाय के नाम पर आतंक फैलाते है।जिस धर्म और सम्प्रदाय का हवाला देकर आतंकवादी कुकृत्य करते है, वो इनके धर्म में कोसो दूर तक नही होता है।हद तो तब होती है जब धर्म के रक्षक भी आतंकवाद के मामले में कुछ भी नही बोलते??आखिर क्यों धर्म के रक्षक आतंकवादियों को मौन स्वीकृत देते है ,क्यों?इसलिए ताकि एक इंसान दूसरे इंसान की जान ले सके?

शायद निजी स्वार्थ के लिए मौन रहते है ,पर हद तो तब होती है जब स्कूलों,बजारों में आतंकवादी हमला कर इनकी भी बिरादरी के ही भाई बंधु को मौत के घाट उतार दिया जाता है ।तब भी ये धर्म के ठेकेदार मौन रहते है ।आतंकवाद के नाम पर मोटी एवं अनैतिक तरीके से रूपया इनके पास आता है और ये ऐय्यासी तथा ऐशोआराम की जिंदगी बिताते है,वही कितने मासुमों को आतंकवादी बनाकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देते है।

छोटे छोटे मासूम व लाचार बच्चों को बहला-फुसलाकर पैसों का लालच देकर, धर्म की गलत व्याख्या करके बच्चों की जिंदगी मुश्किल में डाल देते है। “धर्म,एवं संप्रदाय मुश्किल में है इसे बचाना हम लोगों का फर्ज है ?चाहे इसके लिए खून खराबा ही क्यों ना करना पड़े करेगे?

यही हमारा धर्म और जीने का उद्देश्य है ।”जैसे बातों का प्रयोग कर लाचार मासूम बच्चों को आतंकवादी बना देते हैं और प्रशिक्षण देकर खून खराबा करवाते हैं ।इंसानियत को शर्मसार
करते हैं। जिस देश में आतंकवाद की फैक्ट्री है ,वह देश खुद भी आतंकवाद की मार झेल रहे है ।
कुछ लोगो के द्वारा गंदी राजनीतिक को अंजाम देने के लिए, कुछ लोगों का अपनी निजी राजनीति करने के लिए आतंकवादियों का सहारा लेते है आतंकवादियों को बढ़ावा देते है।

विश्व में कई ऐसे देश है जहां आतंकवाद को बढ़ावा देकर, गलत अवधारणा फैलाकर चंद नेता राजनीतिक करते है।बाकी पूरी आवाम आतंकवाद का शिकार होती रहती है। भारत कई दशक से लगातार आतंकवाद से लड़ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ मुहिम चलाने की शुरूआत भारत हुई है।पूरे विश्व का ध्यान आतंकवाद के मुद्दे पर समय-समय पर भारत दिलाता रहा है, परंतु पूरा विश्व तब इसे हल्के में ले रहा था ,जिसके परिणाम स्वरूप पूरा विश्व आतंकवाद के चपेट में आ गया।

परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि, विश्व के कई ऐसे देश भी हैं ,जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं ।अपने निजी स्वार्थ के लिए उन्हें हथियार और धन मुहैया करा रहे हैं।

जिस कारण आतंकवादियों का मनोबल बढ़ रहा है। विश्व में कुछ देश आतंकवादियों का प्रयोग अपने सामरिक शक्ति और ताकत बढ़ाने में करते हैं वही कुछ देश इसके खात्मे में लगे हैं ।
जब तक पूरा विश्व आतंकवाद के मामले में एक नहीं होगा, तब तक आतंकवादी संगठन ऐसे ही रोज रोज एक के बाद एक बढ़ते रहेंगे ।

इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है की भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया जाए। देश से बढ़कर कोई सेवा नही , कोई धर्म नहीं जैसी भावना को बढ़ावा देना होगा।
देश की रक्षा ,देश का विकास ,देश में रहने वाले लोगों की सुरक्षा ही, मनुष्य का सबसे पहला और आखरी धर्म है ,जब तक यह भावना लोगों में जागृत नहीं होगी तब तक आतंकवाद से भारत तथा विश्व को मुक्ति नहीं मिलेगी।

इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि विश्व के प्रत्येक देश अपने अपने देश में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दें। देश का विकास करें ।देश में शिक्षा रोजगार उचित जीवन स्तर का विकास करें, ताकि आर्थिक अभाव में किसी भी देश के बच्चे आतंकवादी ना बने ।आज तक जितने भी आतंकवादी को भारत की पुलिस ने पकड़ा है उसके जीवन में झांकने के बाद यही दिखा है कि, सब के सब लाचारी और मजबूरी में आतंकवादी बने हैं। उनके सामने पैसों की तंगी एवं घर चलाने की परेशानी रही है, गरीबी रही है ,अशिक्षा रहा है ,जिस कारण ऐसे बच्चे चंद पैसों की लालच में आतंकवादी बन रहे हैं।

जहां इन्हें भोजन के साथ झूठा मनोबल दिखाने के लिए हथियार भी दे दिया जाता है । इनसे ऐसा जताया जाता है कि,ये दुनिया के ताकतवर इंसान है। इन्हें झूठी माया जाल में फंसाकर आतंकवादी बना दिया जाता है। हैं।

भारत में भी आतंकवाद से लड़ने का एकमात्र रास्ता राष्ट्रीयता ही है ।राष्ट्रीयता की भावना गांव की गली से लेकर महानगर की चौड़ी चौड़ी सड़कों तक राजनीतिक गलियारों तक होना जरूरी है, तभी हम आतंकवाद से निपटा जा सकता हैं ।

हमारे देश में सबसे ज्यादा जरूरी राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रीयता की भावना को बढ़ाना जरूरी है क्योंकि, राजनीति से जुड़े लोग ही, देश की हर तरह की दशा एवं दिशा के लिए जिम्मेदार होते है।इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि राजनीतिक पार्टियां आपस में चूहे बिल्ली की तरह लड़ने की वजाय साथ मिलकर देश के के विकास के लिए काम करें ।देश में आने वाली हर समस्याओं को आपसी तालमेल से दूर करने की कोशिश करें ।

प्रत्येक राजनीतिक पार्टियों का एकमात्र उद्देश्य राष्ट्रवाद ही होना चाहिए। जैसे ही यह राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रवाद को महत्व देगे , वैसे ही आम जनता खुद ब खुद राष्ट्रीयता के रंग में डूब जाएगी ।देश से आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा ।

भ्रष्टाचार और अनैतिक तरीके से धन कमानेवाले लोगों अपराधी छवि वाले लोगों पर भी लगाम लगाना जरूरी है। तभी कोई एक आतंकवादी भी हमारे देश में घुसपैठ करने से पहले सौ बार सोचेगा कि हम कहां घुसपैठ कर रहे हैं, “जहां से हमारा जिंदा लौट कर आना मुश्किल है।”

बाहरी किसी भी समस्या से लड़ने के लिए देश की सभी अंदरुनी समस्या का समाधान जरूरी है।गरीबी, अशिक्षा,बेरोजगारी जैसी समस्याओं का मजबूत समाधान होना भी जरूरी है,क्योंकि इन्ही तीन चीजों का अभाव बच्चे तथा युवा को आतंकवाद की तरफ ढ़केलता है।सबसे पहले देश को एक शिक्षित राष्ट्र ,विकसित देश बनाना होगा ,रोजगार के अवसर को बढ़ाना होगा। गरीबी मिटाना होगा ।तब जाकर हम आतंकवाद से पूरी तरह लड़ सकेंगे ।

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