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Kanwar Yatra 2022: पांच वक्‍त के नमाजी फखरुद्दीन ने उठाया कांवड़, कहा-दर्शन से पूरी होती है मनोकामना

बहराइच। धर्म के नाम पर संघर्ष के अनेक उदाहर मिल जाते हैं, लेकिन खुद के धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्म के प्रति आस्था के उदाहरण बिरले ही मिलते हैं। ऐसे में सांप्रदायिक सौहार्द की जीवंत मिसाल हैं कोदही गांव फखरुद्दीन। शनिवार को गांव से तीन दर्जन शिवभक्तों का जत्था कांवड़ लेकर बाराबंकी जिले के लोधेश्वर महादेव के लिए रवाना हुआ तो जत्थे में पांचों वक्त के नमाजी फखरुद्दीन भी शामिल थे।

भगवा वस्त्र में कांवड़ लिए फखरुद्दीन बोल-बम का नारा लगाते हुए अन्य शिवभक्तों के साथ घूरदेवी मंदिर पहुंचे। मंदिर प्रबंधक मोहम्मद अली, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि घुरेहरीपुर विपिन मिश्र, प्रधान हेमनापुर शुभम अवस्थी, व्यवसायी शुभम गुप्त समेत दर्जनों लोगों ने फखरुद्दीन का जोरदार स्वागत किया।

फखरुद्दीन ने घाघरा नदी के तट से कलश में जल भरा। जब फखरुद्दीन से कांवड़ ले जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर कोई एक ही ईश्वर की संतान हैं। बस पूजा-इबादत का तरीका अलग है। हिंदुओं को दरगाह पर चादर चढ़ाने में कोई गुरेज नहीं होता है तो हम लोगों को हिंदू मान्यताओं को मानने व उसका सम्मान करने में क्यों एतराज हो।

वे कहते हैं कि कुछ लोग राजनीति के लिए धर्म का बंटवारा करते हैं और नफरत फैलाते हैं। उन्हें ऐसे लोगों से कोई वास्ता नहीं है। फखरुद्दीन बताते हैं कि अब तक वे कई बार नैमिषारण्य, अयोध्या, वैष्णो देवी जाकर देवी-देवताओं का दर्शन कर आए हैं। उन्हें मनवांछित फल मिलता है, जितनी शिद्दत से पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं, उतना ही श्रद्धा से देवी-देवताओं के मंदिरों व धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि बोलबम के जयकारों के साथ जब गांव से कांवड़ियों का जत्था महादेवा के लिए रवाना हुआ तो उनके हृदय में भी प्रभु लोधेश्वर के दर्शन की इच्छा जागृत हो गई। तैयारी की और चल पड़े भोले बाबा के दर्शन को। फखरुद्दीन की ये बातें सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वालों पर कुठाराघात सा है।

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