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UP : रितिका ने मां-बाप से मुंह फेरा, कोर्ट में बोली-पति है साजिद,उसी के संग रहूंगी

साजिद प्यार की खातिर साहिल बन गया। रितिका भी छह दिन अभिरक्षा में रहने के बाद टस से मस नहीं हुई। बुधवार को कोर्ट में उसके बयान हुए। उसने कहा कि वह बालिग है। अपनी मर्जी से शादी की थी। पति के साथ जाना चाहती है। पति और उसके परिवार से कोई कोर्ट में नहीं आया था। फिलहाल युवती पुलिस अभिरक्षा में है। उसे किसके साथ भेजा जाए। विवेचक को यह फैसला खुद लेना है। कोर्ट ने अपना कोई आदेश नहीं दिया है।

11 अप्रैल को रुनकता निवासी 22 वर्षीय रितिका जैन अपने प्रेमी साजिद के साथ चली गई थी। परिजनों ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। 12 अप्रैल को साजिद ने दिल्ली में धर्म बदला। वह साहिल बन गया। आर्य समाज मंदिर में रितिका से हिंदू रीति रिवाज से शादी कर ली। 13 अप्रैल को नाटकीय अंदाज में पुलिस ने रितिका को बरामद किया। 15 अप्रैल को रुनकता में पंचायत हुई। लोग आक्रोशित हो गए। साजिद उसके भाई और चाचा के घर में आग लगा दी। पुलिस ने पहले दिन ही प्रधान और जिला पंचायत सदस्य सहित नौ आरोपियों को जेल भेजा। युवती आशा ज्योति केंद्र में थी। पुलिस ने सातवें दिन बुधवार को उसे बयान के लिए कोर्ट में पेश किया।

एसपीओ विनोद कुमार यादव ने बताया कि विवेचक विजय विक्रम सिंह ने युवती को 164 के बयान के लिए कोर्ट में पेश किया। युवती ने बयान में कहा कि वह वयस्क है। मर्जी से साजिद से विवाह किया है। पति के साथ जाना चाहती है। विवेचक ने इस पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। कहा कि मामला संवेदनशील है। पीड़िता का पति कोर्ट में नहीं है। उचित सुपुर्दगी में देने का आदेश पारित किया जाए। चूंकि पीड़िता बालिग है। इसलिए कोर्ट ने मौखिक आदेश दिया कि विवेचक स्वयं सुपुर्दगी का निर्णय लें। पुलिस ने युवती से साजिद के बारे में पूछा तो उसने जानकारी से इनकार कर दिया।

एसपी सिटी विकास कुमार का कहना है कि साजिद आएगा तो युवती को उसके सुपुर्द कर दिया जाएगा। युवती से पूछा जा रहा है कि वह किसी रिश्तेदार के घर जाना चाहे तो बता दे। पुलिस छोड़ आएगी। फिलहाल युवती को आशा ज्योति केंद्र ले जाया गया है।

घरवालों से युवती ने नहीं की बातचीत

युवती के परिजन कोर्ट में आए थे। बेटी से बातचीत करना चाहते थे। पुलिस ने बोला कि युवती चाहेगी तभी बात कर सकते हैं। युवती बालिग है। कोई आरोप लगाया तो पुलिस को भी दिक्कत हो सकती है। परिजनों की आंखों में आंसू थे। वे दूर से बेटी को देख रहे थे। सोच रहे कि शायद बेटी बात करेगी। साथ चलने को तैयार हो जाएगी। बेटी ने बातचीत नहीं की। परिजन मायूस होकर लौट गए।

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