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UP : राजस्व परिषद के पूर्व निजी सचिव विवेकानंद डोबरियाल के करीबियों की बढ़ीं मुश्किलें, कानूनगो जितेंद्र सिंह से पूछताछ

लखनऊ। राजस्व परिषद के पूर्व निजी सचिव विवेकानंद डोबरियाल के काले कारनामों में लिप्त कर्मचारियों से पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। डोबरियाल के करीबियाें में शामिल सरोजनीनगर के तत्कालीन कानूनगो और डिफेंस कारिडोर की जमीन अपने रिश्तेदार के नाम कराने वाले जितेंद्र सिंह से पुलिस ने पूछताछ की है। पूछताछ में जितेंद्र ने कई जानकारियां पुलिस को दी हैं। हालांकि उसने खुद को डाेबरियाल का करीबी होने से इंकार किया है।

जितेंद्र का कहना है कि वह राजस्व परिषद के संगठन में पदाधिकारी हैं, जिसके सिलसिले में उनकी मुलाकात विवेकानंद से होती थी। उधर, छानबीन में पुलिस को कई अहम साक्ष्य मिले हैं, जिसमें जितेंद्र के डोबरियाल के नजदीकी रिश्ता होने की पुष्टि हो रही है। जितेंद्र और डोबरियाल में इतने करीबी संबंध थे कि दोनों पारिवारिक कार्यक्रमों में साथ होते थे। जितेंद्र आरोपित को आमंत्रित करता था, जिसमें डोबरियाल पत्नी के साथ शामिल होता था। जितेंद्र की ओर से गोमतीनगर में तीन दिसंबर 2021 को आयाेजित एक कार्यक्रम में भी डोबरियाल पत्नी के साथ पहुंचा था। कार्यक्रम में डोबरियाल की पत्नी ने मंच से गाना भी गाया था।

प्रकरण की जांच कर रही कैसरबाग पुलिस के पास ये सारी जानकारियां हैं। पुलिस ने जितेंद्र से कई सवाल किए हैं, जिनमें अधिकांश के जवाब वह नहीं दे सके। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों के प्रमोशन के नाम पर डाेबरियाल के पास रुपये लेकर जाने वालों के बारे में भी पुलिस को सूचना मिली है, जिनके बारे में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। डीसीपी पश्चिम सोमेन बर्मा के मुताबिक आरोपित के पासपोर्ट और असलहे का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। डाेबरियाल पर इनाम की राशि बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया था, जिसकी संस्तुति भी हो गई है। अब डोबरियाल 50 हजार का इनामी है।

बयान नहीं दर्ज करा सके तत्कालीन तहसीलदारः

कैसरबाग पुलिस ने माेहनलालगंज के तत्कालीन तहसीलदार निखिल शुक्ला को भी बयान दर्ज करने के लिए बुलाया था। इस संबंध में अपर आयुक्त प्रशासन लखनऊ मंडल को पत्र भेजा गया था। इसके बाद अपर आयुक्त ने निखिल शुक्ला को पत्र भेजकर एसीपी कैसरबाग के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि निखिल ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर बयान दर्ज कराने में असमर्थता जताई। स्वस्थ होने के बाद निखिल अपना बयान दर्ज कराएंगे।

20 करोड़ की जमीन के हेरफेर में सुस्त जांचः

अहिमामऊ में 20 करोड़ की जमीन में हेरफेर की गई। नियमों को ताक पर रहकर डोबरियाल के चहेतों को जमीन दे दी गई। बावजूद इसके सरोजनीनगर प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। एसडीएम ने तहसीलदार को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन मामला ठंडे बस्ते हैं। सवाल ये है कि आखिर सरोजनीनगर प्रशासन भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियाें को क्याें बचा रहा है? एसडीएम करोड़ों की जमीन के फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? क्या इसमें बड़े अधिकारियों की भूमिका भी है? सवाल कई हैं, जिनके जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे।

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