Ayodhya

NR मंडलः रेलवे बोर्ड के आदेश का माखौल उड़ा रहे मैकेनिकल ओएंडएफ आरईएसओ विभाग के अफसर

  • NR मंडलः रेलवे बोर्ड के आदेश का माखौल उड़ा रहे मैकेनिकल ओएंडएफ आरईएसओ विभाग के अफसर
  • बाबुओं की जगह दर्जनों लोको निरीक्षकों की नियुक्ति का मामला
  • दशकों से चर्चित लोगों पर बरस रही है रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की कृपा

लखनऊ। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में जहां एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ नवागत मंडल रेल प्रबंधक सचिन शर्मा द्धारा मुहिम चलायी जा रही है वहीं मैकेनिकल आरईएसओ विभाग का एक चर्चित अधिकारी पलीता लगाने में सक्रिय हो गया है। अब देखना ये है कि मंडल में कौन सफल होता है। सूत्रों से छानबीन करने पर जो जानकारी सामने आ रही है वह रेलमंत्री के भ्रष्टाचार और जीरो टारलेंस नीति पर पलीता लगाने को काफी है लेकिन आखिर कौन सा मंत्र है उसके पास कि रेलवे बोर्ड तक के अधिकारी चुप्पी साध रखे है जबकि बोर्ड ने एक सर्कुलर जारी किया कि कोई भी अधिकारी मंडल में पांच वर्ष से अधिक नहीं रहेगा। काफी गहराई से छानबीन करने पर पता चला है कि मंडल आफिस एवं लोकोशेड में बाबुओं के स्थान पर लोको निरीक्षकों की फौज कार्य कर रही है जो कि रनिंग स्टाफ की श्रेणी में आते हैं और इनकां मात्र रनिंग से ही संबधित जानकारी होती है लेकिन इनको टेंडर, कोटेशन मुख्यतः बजट या खरीद फरोख्त से संबधित कार्य करने में अधिकारी लगाए हुए हैं जिसका तनिक भी ज्ञान इनको नहीं है। एक चर्चित अधिकारी के खास लोको निरीक्षक ने बताया कि रोटेशन पूरी सर्विस एक बार भी नहीं होता है और इनको एक बाबू लगभग चार गुना से अधिक वेतन मिलता है जो कि आर्थिक दृष्टि से ठीक नहीं है और इनकी कोई जिम्मेदारी भी निर्धारित नहीं है क्यों कि कार्य की देख-रेख की समीक्षा खुद करते हैं,जिससे ये जिम्मेदारी से बचे रहते हैं सबसे मजे की बात तो ये है कि अधिकारी खुद जिम्मेदारी नहीं लेता है चूंकि ये किसी जिम्मेदारी में नहीं आते हैं। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों से कमीशन खोरी और अवैध आर्डर दिलवाना इनका पेशा है। ऐसे ही अधिकारियों की मांग लखनऊ मंडल में अधिक रहती है। सूत्र ने बताया कि एक कार्य के लिए दो लोको निरीक्षक एवं सहायता के लिए लोको पायलट को भी इनके साथ जी हुजूरी के लिए लगाया गया है इस तरह से लगभग 20 लोको निरीक्षक तथा 60 रनिंग के ड्राईवर व सहायकों की फौज लखनऊ के मैकेनिकल विभाग में संबधित अधिकारी ने लगा रखा है। ये लोग सिर्फ आफिस में ही कार्य करना पसंद करते हैं जिसमें अधिकतर संबधित यूनियनों के पदाधिकारी हैं जो कि नौकरी तो करते नहीं बल्कि अधिकारियों के साथ लगे होने के कारण स्टाफ पर दबाव अवैध वसूली भी करने में सक्रिय रहते हैं जो यूनियनों का चंदा का नाम दिया गया है। महा प्रबंधक एवं रेलवे बोर्ड के अधिकारी बतायेंगे कि कब तक रेल विभाग में बाबुओं की भर्ती पर रोंक लगा कर ये लाखों रुपये हराम का वेतन आहरित करते रहेंगे जब कि देश की आर्थिक स्थिति पर इसका काफी असर पड़ रहा है। सूत्र ने बताया कि उक्त चर्चित सीडीईई खुलेआम आफिसों में बुलाकर कर्मचारियों को अपशब्दों का प्रयोग करता है इसने करोड़ों की जमीन लखनऊ एवं प्रयागराज जैसे शहरों में खरीद के लिए जुटा है।

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