Ayodhya

लोस चुनाव में आयोग के निर्देशों का पालन करें प्रत्याशी-अविनाश सिंह

  • लोस चुनाव में आयोग के निर्देशों का पालन करें प्रत्याशी-अविनाश सिंह

डीएम ने राजनैतिक दलों व अधिकारियों संग एनआईसी कक्ष में की समीक्षा बैठक

अम्बेडकरनगर। जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एनआईसी कक्ष में बैठक आयोजित की गई जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी एवं मुख्य कोषाधिकारी द्वारा विस्तार पूर्वक भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए निर्देश के क्रम में राजनीतिक दलों हेतु निर्गत अनुदेशों की प्रस्तावना, निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण का उद्देश्य, निर्वाचन के दौरान प्रत्याशियों द्वारा व्यय की सीमा एवं अन्य निर्देशों को विस्तार से बताया गया।

इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी ने अवगत कराया कि प्रत्येक निर्वाचन स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संचालित किया जाए। आयोग का यह प्रयास रहा है कि अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों समेत सभी हितधारकों के लिए एकसमान अवसर दिए जाने के सिद्धांत को न बिगाड़ा जाए और निर्वाचन प्रक्रिया को धन शक्ति के दुरुपयोग सहित किसी भी साधन से दूषित नहीं होने दिया जाए।

निर्वाचन व्यय के लिए सहूलियत देने और इसका अनुवीक्षण करने के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र अपनाया जाए धन और बल के खतरे पर अंकुश लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित किया की आम जनता को किसी और असुविधा का सामना न करना पड़े। निर्वाचन व्यय की पहली श्रेणी विधिक व्यय है, जिसकी निर्वाचन-प्रचार के लिए कानून के अंतर्गत अनुमति दी गई है बशर्ते वह अनुमेय सीमा के भीतर हो।

इसमें प्रचार अभियान से जुड़ा वह व्यय भी शामिल होगा जो सार्वजनिक बैठकों, सार्वजनिक रैलियों, पोस्टरों, बैनरों, वाहनों, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, आदि में विज्ञापनों पर खर्च की जाती है। निर्वाचन व्यय की दूसरी श्रेणी में उन मदों पर किए गए खर्च शामिल हैं जिनकी कानून के तहत अनुमति नहीं दी जाती है जैसे कि धन, शराब का वितरण, या निर्वाचकों को प्रभावित करने के प्रयोजन से वितरित की गई या दी गई कोई अन्य वस्तु।

यह व्यय ‘‘रिश्वत‘‘ की परिभाषा के तहत आता है। जो दंड प्रक्रिया संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (अधिनियम) दोनों के तहत अपराध है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 की धारा 78 के अनुसार निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को निर्वाचनों के परिणाम घोषित होने के 30 दिन के अंदर जिला निर्वाचन अधिकारी के पास अपने निर्वाचन व्ययों के लेखे की सही प्रतिलिपि दाखिल करनी होती है।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के एलआर शिवराम गोवडे बनाम टी एमचन्द्र शेखर का उल्लेख करते हुए अवगत कराया की अभ्यर्थी को विधि द्वारा निर्धारित व्यय सीमा के अंदर अपने निर्वाचन व्ययों को रखना होता है। बल्कि उसे निर्धारित रीति से अपने निर्वाचन व्ययों का दिन-प्रतिदिन का सही लेखा रखना होता है और प्रेक्षक, रिटर्निंग अधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति को निरीक्षण के लिए दिखाना होता है और परिणाम घोषित होने के 30 दिन के अंदर संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रस्तुत करना होता है। निर्धारित सीमा से अधिक व्यय विजयी अभ्यर्थी के खिलाफ निर्वाचन याचिका के लिए आधार बन सकता है। इसके अतिरिक्त मुख्य कोषाधिकारी द्वारा अन्य बिंदुओं को भी अवगत कराया गया। बैठक के दौरान प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि गण उपस्थित रहे।

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