Ayodhya

रेलवे स्टेशन अकबरपुर पर तैनात आरक्षण लिपिक बृजेश यादव की संपत्तियों को लेकर चर्चा

?आरक्षण टिकट की कालाबाजारी करवा कर करोड़ों की नामी बेनामी संपत्ति अर्जित करने का आरोप
?विक्रांत यादव ने मामले को लेकर सक्षम एजेंसियों से जांच करवाए जाने की उठाई मांग

अंबेडकर नगर। जहां योगी सरकार पार्ट -2 अपराधियों के खिलाफ ताबङतोङ ऐक्शन मोङ में है तो वहीं जनपद का एक ऐसा नया रेल विभाग में टिकट माफिया सामने आया है जो पूरे जिले में अपना जलवा कायम कर रखा है और खुलेआम आरक्षित टिकटों का कालाबाजारी करवा रहा है और आरपीएफ से लेकर रेलवे अधिकारी, जीआरपी एवं रेलवे विजिलेंस चुप्पी साध रखे हैं। आज तक अकबरपुर नगरपालिका अन्तर्गत लगभग एक बीघा जमीन जोकि लगभग करोङों की खरीद रखा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बृजेश यादव (आरक्षण लिपिक) जो पूरे जनपद में टिकट माफिया के नाम से प्रचलित है दबंग किस्म के अपराधियों से अपनी गहरी पैठ बना रखा है। स्थानीय होने के कारण रेलवे स्टेशन से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर आवास होने का अनुचित लाभ उठाते हुए टिकट की कालाबाजारी आवास से भी करता है।

जनमानस में दलाल टिकट घर के नाम से लोग इसके आवास को जानते हैं। जहां आसानी से टिकट उपलब्ध हो जाता है बस थोड़ा सा लक्ष्मीनिया का चढ़ावा करना पडता है। बृजेश यादव अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर आरक्षण लिपिक के पद पर क्ई वर्षो से तैनात है और इसके ऊपर यूनियन के मंडलमंत्री अवधेश दूबे
की काफी शह बतायी जाती है।

चूंकि अवधेश दूबे भी दबंग किस्म का है जो रेल चालक के पद अयोध्या कैंट स्टेशन पर तैनात है कभी भी डियूटी नहीं करता है और घर बैठकर वेतन ले रहा है। साथ ही साथ बृजेश यादव इतना दबंग है कि इसने अपने चचेरे भाईयों की पत्नियों एवं एक चचेरी बहन पर घात लगाकर षड्यंत्र के तहत ड्यूटी के दौरान लाठी डंडों से लैश होकर अपनी पत्नी के साथ मिलकर जानलेवा हमला कर दिया।

जिसमें तीनों महिलाओं को चोटें आई जिसमें एक गर्भवती महिला खुशबू यादव पत्नी अविनाश यादव (स्वास्थ्य विभाग में तैनात) महिला जीवन मरण के बीच जूझ रही है और कोतवाल ने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं किया जब मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो हो हल्ला मच गया।निर्दयी संवेदनहीन अकबरपुर कोतवाल संजय पांडेय ने तब जाकर एफआईआर दर्ज किया।

सूत्र बताते हैं कि बृजेश यादव खुलेआम कहता है कि मैं रेलवे के अधिकारियों एवं विजिलेंस को पैसा भेजता हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड सकता। नाम न छापने की शर्त पर आरपीएफ के एक जवान ने बताया कि सुबह खिङकी खुलते ही बृजेश यादव एवं एक और टिकट माफिया के दो दर्जन युवक लाईन में लग जाते हैं।

और ये सब इतने दबंग हैं कि आरपीएफ से भी हाथापाई करने पर उतर हो जाते हैं क्योंकि ये क्षेत्रीय होने के साथ-साथ अपराधी प्रवृत्ति के मनबढ दबंग हैं ।
मिली जानकारी के अनुसार विगत वर्षो पूर्व इसका तबादला शाहगंज के लिए हो चुका है लेकिन ये इतना दबंग है कि अपना तबादला रोंकवा लिया।

✒️ (अगले अंक में पढें बृजेश यादव के काले कारनामें का सच…)

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