Ayodhya

एडीएम साहब : राम शकल ही नहीं बाल किशन भी है डीआईओएस के कमाऊ पूत

  • एडीएम साहब : राम शकल ही नहीं बाल किशन भी है डीआईओएस के कमाऊ पूत

(Report- M. L.Sukla)

अंबेडकरनगर | अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा और वित्त विभाग दीपक कुमार द्वारा माध्यमिक सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ अध्यापकों का 17 महीने के बकाया वेतन का शासनादेश जारी होने के बावजूद भी डेढ़ महीने होने वाला है जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक और वरिष्ठ कोषा अधिकारी की मिली भगत के कारण वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है जिसमें मुख्य भूमिका तो जिला विद्यालय निरीक्षक गिरीश कुमार सिंह की है जो मीठी बात तो करते हैं लेकिन काम अपनी शर्तों पर करने के लिए जाने जाते हैं |

पड़ोसी जनपद आजमगढ़ के निवासी जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी मीठी वाणी और मीठी गोली नैतिकतावाली बात के बल पर जिला अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी और जिले के लोगों को माया जाल में फंसा कर ऐसा रखे हैं कि उनके कार्यालय में जिन महानुभावों का कार्य पड़ जाता है तब उनके समझ में आता है कि मेरा कार्य कहां दुर्भाग्य से पड़ गया है |

जब अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा और वित्त विभाग के शासना देश का पालन मनबढ़ डीआईओएस द्वारा नहीं किया जा रहा है तो यह अंदाजा लगाना सहज हो जाता है कि यह सामान्य व्यक्तियों का कार्य कैसे करते होंगे ?जब तदर्थ अध्यापक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से प्रदर्शन करते हुए जिला अधिकारी कार्यालय जा रहे थे तो बीच-बीच में उनके नारे में यह भी शामिल था ,जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कार्यरत राम शकल बाबू की भूमिका भी इसमें काफी हद तक शामिल है परंतु यह जानना भी बहुत जरूरी है कि इस कार्यालय में सबसे महत्वपूर्ण पटल के बाबू बाल किशन भी राम शकल से कम नहीं है |उनके कार्यालय में भी दिनभर मंडी लगती है और शाम को बोली होने के बाद ही उस व्यक्ति की पत्रावली आगे बढ़ती है |

इसलिए एडीएम साहब अगर वास्तव में आप माध्यमिक शिक्षा विभाग में कुछ सुधार लाना चाहते हैं तो आपको वहां से राम सकल के साथ-साथ बालकिशन को भी हटाना ही पड़ेगा अन्यथा वहां पर व्याप्त मनमाने पन पर अंकुश लगा पाना संभव नहीं होगा |यदि आप को भरोसा न हो तो अपने स्तर से जानकारी कर लीजिए| क्यों की जनपद की जनता आप को आशा भरी निगाहों से देखते हुए योगी जी के सुशासन के तरफ आस लगाए बैठी है | इस बात की गूंज पूरे जिले में है कि डीआईओएस कार्यालय में छोटे से छोटा काम कराना आसान नहीं है |

अब देखना है किं जिले के जनप्रिय और अपने दायित्वों के प्रति सजग अपर जिला अधिकारी का ध्यान कब डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों में आमजन को परेशान करने वाले सबसे मलाईदार पटल के बाबू बाल किशन के कारगुजारियो के तरफ कब जाती है और उसकी संबद्धता डीआईओएस कार्यालय से हटाई जाती हैं ताकि उस दफतर में काम पड़ने पर लोगो का।कार्य सुगमता पूर्वक हो सके | ध्यान देने योग्य बात यह भी है की बालकिशन यादव की तैनाती कार्यालय में नहीं है बल्कि डीआईओएस की कृपा से उनका सबसे महत्वपूर्ण मलाईदार पटल का चार्ज मिला हुआ है | जब कि पूर्व में कई बार इनकी शिकायत जुझारू एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा शासन में की गई थी |

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