Ayodhya

उपभोक्ताओं के गले की फांस साबित हो रहा विद्युत विभाग की ओटीएस योजना

  • बेतहासा बढ़े बिल को लेकर अधिकारियों का चक्कर लगाते फिर रहे उपभोक्ता
  • अवर अभियंता,सहायक अभियंता व अधिशाषी अभियंता सभी का एक ही जवाब साफ्टवेयर में गड़बड़ी

(एम.एल.शुक्ल)

अम्बेडकरनगर। सरकार द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं के बकाये बिल में राहत देने के लिए एक मुस्त समाधान योजना चलायी जा रही है किन्तु इसमें साफ्टवेयर की गड़बड़ी के चलते उपभोक्ताओं के लिए गले की फांस बन गयी है। इसे लेकर लोगों को विद्युत विभाग के अधिकारियों का चक्कर लगाते देखा जा रहा है। निराकरण न होने से सभी काफी परेशान हैं।

ज्ञात हो कि सरकार आमजन की समस्याओं के निराकरण तथा कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है। इस दिशा में निरन्तर विभागीय अधिकारियों को निर्देश भी दिया जा रहा है। सरकार की मंशा है कि आमजनता को योजनाओं का लाभ मिले किन्तु इसमें अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी और कभी-कभी साफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

इसी क्रम में विद्युत उपभोक्ताओं को उनके बकाये बिल में राहत देने के लिए ओटीएस (एकमुश्त समाधान ) योजना चलायी गयी है। योजना में बिल के अलावा जो अधिभार है वह पूरी तरह से छूट दे दिया गया है। योजना में अधिक से अधिक उपभोक्ता लाभान्वित हो तिथि भी बढ़ाई जा रही है।

इस योजना में हजारों की संख्या में उपभोक्ताओं जिसमें कुछ तो अपने बकाये बिल को एक मुश्त जमा करके अपनी समस्या का निराकरण कर लिये किन्तु ज्यादातर जिनके पास बकाये बिल के सापेक्ष रकम नहीं हो पा रही है। उनके द्वारा रजिस्ट्रेशन कराकर किस्त बनवाये जा रहे हैं।

योजना शुरूआत के दौरान तमाम उपभोक्ताओं ने बिल को जमा किया और जब अगले महीने किस्त और गत माह के बिल जमा करने की बारी आयी तो उन्हें विभाग से यह बताया जा रहा है कि उन्हें इस बार कितना जमा करना है इसे सुनते ही उपभोक्ताओं के पैर तले जमीन खिसक जा रही है कारण उनकी किस्त के साथ बिल रिकार्ड में बेतहासा बृद्धि होकर दिखायी पड़ रहा है।

इस समस्या को लेकर जिले के विद्युत वितरण खण्डों और उपकेन्दों पर उपभोक्ता चक्कर लगा रहे हैं जहां अधिकारी निराकरण करने में अपनी अस्मर्थता जता रहे हैं उनके द्वारा यह एक ही जवाब है कि क्या करें साफ्टवेयर सरकार ने ऐसा विकसित किया है कि इसमें संसोधन करने से जो छूट मिलना है वह नहीं हो पायेगा।

एक उपभोक्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसके द्वारा एक किलोवाट का ग्रामीण कनेक्शन लिया गया है। एकमुश्त समाधान योजना का लाभ लेने के लिए 79 हजार बिल के सापेक्ष लगभग 43 हजार की किस्त बनवाया तत्काल 12 हजार 5 सौ जमा कर दिये।

इसके बाद इस माह में जब बिल जमा करने गया तो किस्त की रकम 2 हजार 6 सौ पचासी तथा जो बिल गत माह का आया वह 2 हजार 4 सौ रूपये था जब कि विद्युत उपभोग न्यूनतम किया जा रहा है। इस समस्या को लेकर जेई से सम्पर्क करने पर उनके द्वारा सहायक अभियन्ता व अधिशाषी अभियंता को सलाह दी गयी उनसे मिलने पर बस एक ही जवाब मिला कि क्या करें ? साफ्टवेयर की वजह से इसमें कुछ सुधार किया जाना सम्भव नहीं है जो है उसे जमा ही करना पड़ेगा। इससे कहा जा सकता है कि एक मुश्त समाधान योजना उपभोक्ताओं के लिए गले की फांस बन गया है।

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