Ayodhya

आखिर कौन है? 55 लोकसभा का प्रत्याशी जिसके समर्थक किसी भी दशा में चुनाव जीतने की बना रहे रणनीति

  • आखिर कौन है? 55 लोकसभा का प्रत्याशी जिसके समर्थक किसी भी दशा में चुनाव जीतने की बना रहे रणनीति
  • ऐसी दशा में दलीय प्रत्याशियों में सम्बंधित तक क्या पहुँच पायेंगे आयोग के हाथ?
  • समूचे संसदीय क्षेत्र में लछिमिनियां के सहारे चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी की चर्चा जोरों पर

अम्बेडकरनगर। 55 लोकसभा अम्बेडकरनगर के चुनाव में आखिर कौन है दलीय प्रत्याशियों में जिसके समर्थकों द्वारा भले की आयोग निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव कराने के लिए संकल्पित है किन्तु विजय हासिल करने के लिए वह प्रभाव व प्रलोभन का सहारा लेने को आतुर है और यह क्षेत्र में कहा जा रहा है कि कुछ भी हो चुनाव जीत कर ही रहेंगे। इसकी चर्चा समुचे संसदीय क्षेत्र में जोरों पर चल रही है। अब देखना यह है कि आयोग अपनी मंशा में कामयाब रहेगा अथवा सम्बंधित प्रत्याशी व उसके समर्थक।
ज्ञात हो कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा छठवें चरण के चुनाव की तिथि 25 मई को सुनिश्चित है। 55 लोकसभा अम्बेडकरनगर का चुनाव इसी चरण में होना है। इसके लिए आयोग द्वारा निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव सम्पादित कराने के लिए ठोस कदम उठाया जा रहा है। जिले भर में प्रशासनिक मशीनरी और आयोग के अधिकारी और कर्मचारियों की चेकिंग अभियान जारी है। ता कि मतदाताओं को किसी प्रत्याशी व उसके समर्थक द्वारा प्रभाव व प्रलोभन के सहारे गुमराह करके पक्ष में मतदान न कराया जा सके। ऐसी दशा में वाहनों की जांच करायी जा रही है।

इसके बावजूद भी इस संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले दलीय प्रत्याशियों में इन दिनों कोई इस तरह का है कि जिसके समर्थकां द्वारा यह कहते सुना जा रहा है कि कुछ भी हो चुनाव तो जीतना है भले ही हर मतदाताओं को पाले में करने के लिए कितना भी रूपया खर्च करना पड़ जाये। इसकी चर्चा अकबरपुर,कटेहरी,जलालपुर,टाण्डा व गोशाईगंज आदि विधानसभा क्षेत्र में कहीं भी चले जाइये होते जरूर सामने आ जायेगा।

अब सवाल यह है कि जिस तरह से सम्बंधित प्रत्याशी और उसके समर्थक यह दावा करते फिर रहे हैं, ऐसी दशा में आयोग द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान कार्यक्रम जो चलाया जा रहा है इस मौके पर सभी को यह बताया भी जा रहा है कि राष्ट्र की मजबूती में बेहतर प्रत्याशी का चयन करें। किसी के प्रभाव प्रलोभन में आने से बचे। स्वत्रंत होकर मतदान करें आदि उपदेश दिया जा रहा है।

अब यह कहना लाजमी है कि जिस तरीके से सम्बंधि्ांत प्रत्याशी और उनके समर्थक द्वारा लछिमिनियां के बलबूते विजय पाने का सपना संजोया गया है। क्या उस प्रत्याशी और उसके समर्थक तक आयोग के अधिकाररियों के हाथ पहुचेंगे? अथवा वह अपनी मंशा में कामयाब रहेगा। फिर हाल अभी तक वह निर्दलीय प्रत्याशी है या दलीय यह जनमानस द्वारा स्वर मुखर होकर सामने नहीं आ रहा है लेकिन उसकी रणनीति चुनाव जीतने के लिए पूरी तरह से तैयार किया जाना बताया जा रहा है।

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